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मध्यप्रदेश से पकड़े गए ISI एजेंट्स से हो सकती है उरी और पठानकोट हमलों में पूछताछ

मध्यप्रदेश से पकड़े गए ISI एजेंट्स से हो सकती है उरी और पठानकोट हमलों में पूछताछ

कुछ दिन पूर्व मध्यप्रदेश ATS ने कार्यवाही करते हुए, भोपाल से पहले 11 व बाद में अन्य युवाओं की गिरफ़्तारी की थी, ये युवक नकली एक्सचेंज बनाकर पाकिस्तानी नंबरों को भारतीय नंबर में कन्वर्ट करके आईएसआई के अफसरों की भारतीय सेना के अफसरों से बात कराया करते थे. मीडिया में आई खबरों के अनुसार इन्हें इस काम के लिए अच्छी खासी रक़म मिलती थी. इन्ही युवकों में से एक युवक ध्रुव सक्सेना, जो कि भोपाल में युवा मोर्चा आईटी सेल का ज़िला संयोजक था, एक अन्य युवक बलराम जोकि मध्यप्रदेश के सतना का निवासी है, बजरंग दल एवं व्हीएचपी का सदस्य बताया जा रहा है. वहीँ भाजपा के एक पार्षद का जेठ जितेंद्र ठाकुर भी गिरफ़्तार किया गया है

मध्यप्रदेश एटीएस द्वारा गिरफ़्तार किया गया ISI एजेंट ध्रुव सक्सेना हाथ में लेपटॉप लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के मंच पर , दूसरी फ़ोटो में नकली एक्सचेंज दिखाते ATS के अधिकारी

गौरतलब है कि आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के नेता बलराम सिंह को एटीएस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। बलराम कॉल सेंटर की आड़ में अपने 6 साथियों के साथ मिलकर आईएसआई के लिए जासूसी करता था। उसने बहुत से फर्जी बैंक खाते खुलवा रखे थे और उनका इस्तेमाल आईएसआई एजेंटों को पैसा मुहैया कराने में करता था।
मध्यप्रदेश से पकड़े गए जासूसों से उरी और पठानकोट हमले पर भी होगी पूछताछ 
मध्यप्रदेश से पकड़े गए आरोपियों से NIA पठानकोट और उरी हमले पर भी पूछताछ कर सकती है, देश की विभिन्न राज्यों की पुलिस एवं ख़ुफ़िया एजेंसियां भी पूछताछ करना चाहती हैं, ज्ञात हो ये अब तक का सबसे बड़ा जासूसी नेटवर्क बताया जा रहा है. मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार बलराम जिन खातों का इस्तेमाल करता था, उनके एवज में तयशुदा रकम उपलब्ध कराता था। बलराम के पास कुल 110 एटीएम कार्ड थे। उन एटीएम की मदद से वह अलग-अलग बैंक खातों से आई रकम को आईएसआई एजेंटों के खातों में डालता था। इसके बैंक खाते मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों में भी थे। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की एटीएस टीमें उससे पूछताछ में जुटी हैं। दिल्ली की स्पेशल सेल भी उससे पूछताछ कर चुकी है। बलराम समेत उसके छह साथियों से पूछताछ के बाद अब आशीष सिंह राठौर का नाम सामने आया है। एटीएस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आशीष सिंह जो की गौरक्षा दल का सदस्य था, वो और  सी.बी. सिंह नामक एक युवक बलराम के लिए काम करते थे। फिलहाल एटीएस दोनों को तलाश में छापेमारी कर रही है।
पिछले दिनों गिरफ्तार किये गए युवकों के बारे में जानकारी देते हुए एटीएस प्रमुख संजीव शमी ने बताया था कि गत नंवबर माह में जम्मू में अतराष्ट्रीय सीमा पर आर एस पुरा सेक्टर में सतविंदर सिंह और दादू नामक दो व्यक्तियों को वहां सुरक्षा प्रतिष्ठानों की तस्वीरें लेने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों द्वारा इन दोनों से पूछताछ के बाद मध्य प्रदेश एटीएस ने सतना से बलराम नामक व्यक्ति को पकड़ा, जो कि पाकिस्तान में बैठे लोगों द्वारा संचालित इस गिरोह के लिये देश में हवाला करोबार के जरिए धन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराता था।
एटीएस प्रमुख शमी ने कहा कि विदेशों से गिरोह के लोगों द्वारा हवाला के जरिए बलराम के खातों में अलग-अलग नामों से बार-बार धनराशि जमा की गई थी. विदेशों से गिरोह के लोगों द्वारा पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल में नाम और पहचान छिपाई जाती थी। विदेशों से आने वाले कॉल को एक्सचेंज के जरिए रूट कर भारतीय मोबाइल नंबर से देश में फोन पर बात की जाती थी। इसमें निजी टेलीफोन कंपनियों के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं।
 

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