जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी हाल ही में दिल्ली में थे. वो अपने देश के राजा की भारत में प्रस्तावित यात्रा से पहले दोनों देशों के मध्य आयोजित द्वी-पक्षीय वार्ता में सम्मिलित हो रहे थे. उन्होंने भारतीय पत्रकार सुहासिनी हैदर को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया. हम उस इंटरव्यू का हिंदी अनुवाद पब्लिश कर रहे हैं.

ऐसा माना जाता है कि भारत और जॉर्डन के मध्य हस्ताक्षरित संधियों में उल्लेखित शर्तों को उनके मूल रूप में अपनाया एवं निभाया नहीं गया है. क्या आप ऐसा मानते हैं?

दोनों देशों के मध्य संभावनाएं अपार हैं लेकिन हाँ यह जरूर कहा जा सकता है की उन संभावनाओं को पूर्ण रूप से इस्तेमाल नहीं किया गया है. मैं यह मानता हूं कि दोनों देशों के मध्य व्यापार 2 बिलियन डॉलर का है लेकिन उसमें से ज्यादातर व्यापार केवल चंद वस्तुओं का ही होता है. जैसे की पोटाश एवं फॉस्फेट, हम उम्मीद करते हैं कि हम आने वाले समय में और वस्तुओं का व्यापार करने में भी सक्षम हो पाएंगे. जॉर्डन, भारत के लिए एक बड़ा मार्केट साबित हो सकता है और हम यह उम्मीद करते हैं, कि भारतीय कंपनियों के द्वारा जॉर्डन में बेहतर निवेश होगा. ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ और ‘एनर्जी’ के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं और दोनों देश इस दिशा में काफी संधियां कर सकते हैं.  हमारे देश के राजा, की २०१८ के शुरुवात में भारत यात्रा प्रस्तावित है और उसके तुरंत बाद हम इन संभावनाओं को तलाशेंगे जिसमें हम दोनों देशों के मध्य हस्ताक्षरित संधियों पर बेहतर ढंग से काम कर सकें .

अपने संभावनाओं की बात की, लेकिन जॉर्डन में राजनीतिक उठापटक चल रही है. जॉर्डन में लाखों की संख्या में फलीस्तीन और सीरिया से आए हुए रिफ्यूजी रह रहे हैं. 2018 में स्थितियां किस प्रकार से बदलने की उम्मीद है?

हमारे लिए अहम मुद्दा फिलिस्तीन-इसराइल का विवाद है और हम यह मानते हैं क्षेत्र में शांति और स्थायित्व तब तक नहीं आ सकता जब तक कि इन दोनों देशों के मध्य बातचीत के द्वारा एक द्वी-राष्ट्रीय (Two-Nation) हल ना निकाला जाए. और द्वी-राष्ट्रीय (Two-Nation) हल से हमारा मतलब फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र बना कर अधिकृत (पूर्वी) जेरूसलम को उसकी राजधानी घोषित किया जाए जो कि १९६७ में तत्कालीन यथा स्थिति थी.

इस हल से न केवल फिलिस्तीन में बल्कि इजराइल में भी शांति स्थापित हो सकती है. हम चाहते हैं कि विश्व के समस्त राष्ट्र इस प्रस्ताव को गंभीरता से लें. जहां तक भारत का सवाल है, तो हम यह समझते हैं कि भारत ने हमेशा न्यायायिक और शांति स्थापित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है और हम यह मानते हैं कि आने वाले समय में भारत, इजरायल और फिलिस्तीन के मध्य विवाद को सुलझाने में एक अहम भूमिका निभाएगा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान सरकार ने यह बयान दिया था कि भारत की फिलिस्तीन और इजराइल विवाद के विषय में स्थिति साफ़ नहीं है. क्या आप मानते हैं कि भारत अभी भी दो देशों के मध्य शांति प्रस्ताव में कोई भूमिका निभा सकता है?

भारत ने हमेशा शांति स्थापित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है. हाल ही में भारत के द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ में फिलिस्तीन के समर्थन में किया गया वोट इस बात का एक उदाहरण है कि भारत हमेशा से एक न्यायिक स्थिति के साथ खड़ा रहा है. हम भारत की भूमिका का सम्मान करते हैं. हम और हमारी सरकार भारत की विदेश नीति पर टिप्पणी करने के इच्छुक नहीं है और हम यह समझते हैं कि भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और उसके द्वारा लिया गए फैसले हमेशा जनता के हित में होगा. हम भारत से शांति के समर्थन में उसकी सक्रिय भूमिका की उम्मीद करते हैं और यह समझते हैं कि भारत प्रस्तावित द्वी-राष्ट्रीय (Two-Nation) हल का भी समर्थन करेगा.

सीरिया में जारी अशांति के शुरुआती दौर में जॉर्डन उन देशों में से एक था जिसने असद अल बशर का सकारात्मक विरोध करने वाले समूहों को न केवल संरक्षण दिया था बल्कि उनके सैन्य अभ्यास में भी अहम् भूमिका निभाई थी. और पूरे विश्व ने देखा कि किस प्रकार से ‘इस्लामिक स्टेट’ ने इन्हीं समूहों में से सैनिकों को अपनी संगठन में भर्ती किया. क्या आप मानते हैं कि आपके द्वारा उन समूहों को हथियार देना और सैन्य अभ्यास कराना, आपके देश के द्वारा की गई एक गलती थी?

इस्लामिक स्टेट के किसी भी सैनिक को जॉर्डन में सैन्य प्रशिक्षण नहीं दिया गया था. लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं है की जॉर्डन के कई सैनिकों इस्लामिक स्टेट की सेना में सम्मिलित हुए हैं. लेकिन ऐसा विश्व के हर देश के साथ हुआ है और खास तौर पर अरब और मुस्लिम राष्ट्रों के साथ तो ऐसा बड़े पैमाने पर हुआ है. दरअसल इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में लोगों के ऊपर हो रही ज्यादती का फायदा उठाकर उन पर अपने नफरत का एजेंडा थोपा है. अब जबकि इस अशांति को 7 साल हो चुके हैं तो हमें थोड़ा रुक कर यह सोचना होगा कि क्या हम इस पूरी स्थिति को बेहतर ढंग से संभाल सकते थे. आज हमे बेहतर शिक्षा देने की जरूरत है, हमें किसी भी प्रकार के नस्लीय, धार्मिक एवं लिंग भेदभाव का विरोध करना होगा.

भारत और पाकिस्तान के मध्य चल रहे विवाद के दौर में आप किस प्रकार से भारत से प्रगाढ़ संबंध की उम्मीद करते हैं, जबकि खुद आपके देश के पाकिस्तान से काफी घनिष्ठ संबंध है? क्या आपको इस वजह से भारत से संबंध अच्छे करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?

जहां तक आतंकवाद का सवाल है तो हमारे देश ने हमेशा इसे खारिज किया है और इसका हर प्रकार से विरोध किया है. जॉर्डन ने हमेशा सभी राष्ट्रों को एक मंच पर आकर हर प्रकार के मतभेद को मिटाकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरित किया है. जॉर्डन के भारत एवं पाकिस्तान दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और हम उम्मीद करते हैं कि दोनों देश आपसी सहमति से अपने हर विवाद को सुलझा लेंगे और शांति स्थापित करेंगे जो कि न केवल भारतीय जनता के लिए बल्कि पाकिस्तानी नागरिकों के लिए भी एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेगा.

यह इंटरव्यू मूल रूप से अंग्रेज़ी भाषा के मशहूर अखबार “द हिंदू” में पब्लिश हुआ था