क्या आप नेटबैंकिंग / ईबैंकिग, मोबाइल वॉलेट आदि ऑनलाइन पेमेंट ऍप्स इस्तेमाल करते है यदि हाँ तो यह खबर आपको अंदर तक हिला सकती है। पोस्ट लंबी है तो दिल थाम कर पढ़ें।
सबसे पहले कुछ डायनामिक डाटा पेश करता हूँ, 2020 तक भारत मे स्मार्टफोन उपयोग करने वालो की संख्या 50 करोड़ तक पहुँचने वाली है। नेट बैंकिग का इस्तेमाल करने वाली संख्या 15 करोड़ तक पहुँचने की संभावना है। भारत का सबसे बड़ा सरकारी बैंक 2022 तक अपने सारे एटीएम बंद करके सबकुछ “योनो”एप्प में शिफ्ट करने वाला है। निजी बैंक तो यह काम तो कॉस्ट कटिंग के कारण कब से शुरू कर चुके हैं। मतलब आने वाले समय सबकुछ ऑनलाइन होने वाला है। ऑनलाइन होना अच्छी बात है, लेकिन क्या यह सब सुरक्षित और भरोसे करने के लायक होने वाला है ?
व्हाट्सएप जासूसी कांड के बाद पेगासिस नाम के मालवेयर पर मैं और मेरे कई साथी इस कांड की तह तक जाने की कोशिश कर रहे थे। तब हमे एक बहुत बड़ी चीज पकड़ में आई, व्हाट्सएप में जो सेंध लगी उस पर में पहले लिख चुका हूँ। लेकिन अभी जो जासूसी हुई है उसमें व्हाट्सएप की कोई गलती नहीं है। और उन्होंने बाकायदा सरकार को दो बार लिखित में वार्निंग दी थी। कि ऐसा कुछ होने वाला है, लेकिन सरकार सोती रही और उसने कोई एक्शन नही लिया। व्हाट्सएप ने माना कि चूक हुई है, लेकिन यह नही बताया कि गलती किसकी है। बस यही से हमारी टीम ने रिसर्च शुरू कर दिया कि असली मुजरिम कौन है ?
आपको यह सब सरल शब्दों में समझाता हूँ। मान लीजिए ऑपरेटिंग सिस्टम एक शहर है और ऍप्स उसमे बसने वाले लोगों के मकान है। पेगासिस जैसा वायरस एक ऐसा शक्तिशाली राक्षस है। जो प्रकाश की गति से तेज है और हवा की तरह उसकी सब जगह पहुँच है। एक दिन यह राक्षस पूरे शहर पर कब्जा जमा लेता है। और बस मौके की तलाश में रहता कि आप अपने घर में हल्की सी भी जगह छोड़े और वो आपका सब कुछ लूट ले पर क्या यह आप नही जानना चाहेगे इस शत्रु ने इस शहर पर कब्जा कैसे किया?
ऑपरेटिंग सिस्टम रूपी शहर की मल्टी लेयर दीवारें एक जेल की दीवारों से ज्यादा ऊँची और मजबूत होती है, जिसको तोड़ पाना किसी भी वायरस रूपी राक्षस के लिए बहुत मुश्किल होता है। पेगासिस राक्षस को बनाने वाले ने जो काम एंड्रॉयड के साथ किया है। वो काम इससे पहले सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एप्पल आपरेटिंग सिस्टम ios के साथ कर चुका है। एप्पल ने अपनी दीवारों को मजबूत तो बनाया था, लेकिन दीवारों में सर्विलेंस सिस्टम (असेंबली प्रोग्रामिंग) लगाना भूल गया। जो राक्षस की आहट (लॉग्स) सुनकर अंदर के दरवाजे अपने आप बंद कर देता था। तकनीक की दुनिया मे इस घटना को जेलब्रेक कहा जाता है। एप्पल ने तुरंत अपनी गलती मानी औऱ 24 घँटे में उन सब यूजर को से संदेश भेज दिया जिनके फोन में यह सेंध लगी थी और 15 दिन में उन्होंने अपने सॉफ्टवेयर को फूल प्रूफ कर लिया, लेकिन व्हाट्सएप के मामले बीच गूगल क्यो चुप है। यह काम तो केवल एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले फोन पर हुआ है। गूगल ने अब तक इस पर अपना मुंह क्यो नही खोला है?
गूगल इस सब पर चुप बैठा है क्योंकि वो जानता है अगर उसने अपनी दीवारों को मजबूत बनाया, तो यूजर का डाटा कैसे बाहर आएगा अगर वायरस नही आयेगा तो वो अपना एन्टी वायरस कैसे बेचेगा। उसका तो पूरा ऐड बिजनेस डाटा एनालिटिक्स पर ही चलता है, डाटा को बेचने तक तो ठीक था। लेकिन क्या गूगल आपके बैंक अकाउंट की सुरक्षा से भी समझौता कर सकता है अगर पेगासिस वायरस एप्पल, गूगल ,व्हाट्सएप, और फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों की सायबर सुरक्षा को भेद सकता है। तो क्या आपके बैंकिग ऍप्स को क्रेक नही कर सकता है, तो मेरा जवाब है बिलकुल कर सकता है। इस पर हमने लाइव एक्सपेरिमेंट किया है और यकीन मानिए इसके रिजल्ट आपके पाँव तले जमीन खिसका देंगे।
हमारी इस रिसर्च और प्रयोग ने भारतीय ऑनलाइन बैंकिग सिस्टम से हमारा भरोसा उठा दिया है। इस प्रयोग के रिजल्टस को कल विस्तार से लिखूँगा, अभी यह जान लीजिए की आपके व्हाट्सएप खाते से लेकर बैंक खाते तक सबकुछ खतरे में है। और सरकार चादर ओढ़ कर सोइ हुई है। हमने इस पूरे प्रयोग में बहुत मेहनत औऱ रिसर्च की है और काफी समय भी लगाया है। आपको बस एक दिन और वेट करना है तो तब तक आइये इस संदेश को फैलाये और सोती सरकार को कुंभकर्णी नींद से जगाये।

क्रमशः….
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Apurva Bhardwaj

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