देश में काले धन के खिलाफ अब तक की बड़ी उपलब्धी हासिल की है आयकर विभाग ने. और इसके खिलाफ बना न्य कानुन ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया.
 
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने गुरुवार को कहा है कि, “इनकम टैक्स अथॉरिटीज ने फ्लैट्स, शॉप्स, ज्वैलरी और गाड़ियों समेत 900 बेनामी प्रॉपर्टीज को अटैच किया है. इन प्रॉपर्टीज की कीमत 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा है.”
बोर्ड ने एक बयान में कहा है कि उसने प्रोहिबिशन ऑफ बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शंस ऐक्ट के तहत ऐसी संपत्तियों को कब्जे में लेने के कदम तेज कर दिए हैं. उल्लेखनीय है कि यह कानून एक नवंबर 2016 से प्रभावी हुआ है.
आयकर विभाग ने एक बयान में कहा कि उसने बेनामी संपत्ति लेन-देन रोकथाम कानून के तहत यह कार्रवाई तेज कर दी है. इसी के तहत आयकर विभाग ने 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की 900 से अधिक बेनामी संपत्तियां जब्त की हैं. इसमें फ्लैट, दुकानें, आभूषण और वाहन इत्यादि शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि यह कानून एक नवंबर 2016 से प्रभावी हुआ है.

बेनामी का शाब्दिक अर्थ है बिना नाम वाला. ऐसी कोई भी संपत्ति जिसका कोई वैध मालिक न हो या जिसपर संदिग्ध मालिकाना हक हो, उसे बेनामी कहा जाता है. मूल बेनामी ऐक्ट को 1988 में पेश किया गया था ताकि ब्लैक मनी को रोका जा सके. इसे 2016 में संशोधित किया गया और यह कानून एक नवंबर 2016 से प्रभावी हुआ है.  इसमें बेनामी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार दिया गया.

इस कानून के तहत पहले चल-अचल किसी किस्म की बेनामी संपत्तियों को फौरी तौर पर कुर्क करने और फिर उनको पक्के तौर पर जब्त करने की कार्रवाई करने के प्रावधान है. इसके अलावा इसके तहत ऐसी सम्पत्तियों का वास्तविक लाभ लेने वाले स्वामी, बेनामी संपत्ति धारक और बेनामी संपत्ति के लिए लेनदेन करने वालों के खिलाफ अभियोग चलाया जा सकता है. इसके तहत दोषियों को 7 साल तक का सश्रम कारावास और संपत्ति के उचित बाजार मूल्य के 25% तक जुर्माने का भी प्रावधान है.

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