October 20, 2021
उत्तरप्रदेश

योगी सरकार के कब्ज़े के बाद मनाया गया यूनिवर्सिटी स्थापना दिवस

योगी सरकार के कब्ज़े के बाद मनाया गया यूनिवर्सिटी स्थापना दिवस

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर सरकार कर कब्ज़े के बाद बीते शनिवार को यूनिवर्सिटी का स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरन कोरोना गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए, कर्यक्रम किया गया। इस कार्यक्रम की शुरूआत मोहम्मद सलमान और मोहम्मद सुफियान ने तिलावत से की, इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए।

बता दें कि कुछ दिन पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर से सपा सांसद आज़म खान को एक बड़ा झटका देते हुए फैसला सुनाया था। फैसले में कहा गया था कि जौहर यूनिवर्सिटी का जो बड़ा गेट है, वो पीडब्ल्यूडी की सड़क पर है जो कि गैरकानूनी है। इसके बाद हाइकोर्ट के फैसले के आधार पर सरकार ने जौहर यूनिवर्सिटी की 70 एकड़ जमीन पर कब्ज़ा कर लिया।

जौहर यूनिवर्सिटी में मनाया गया स्थापना दिवस:

सरकार के अधिग्रहण के बाद जौहर यूनिवर्सिटी में ये पहला कार्यक्रम था। कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के स्थापना दिवस का था। जिसके लिए छात्र और शिक्षकों को कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना था। जो बखूबी किया भी गया। गाइडलाइंस के मद्देनजर कार्यक्रम की तैयारी की गई। वहीं कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत से की गई।

इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश हुए और यूनिवर्सिटी के सफर पर कविता पाठ् किया गया। इस दौरन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सुल्तान मोहम्मद खान ने कहा कि “छात्र कोरोना गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए अपनी पढ़ाई करें।” कार्यक्रम के दौरन प्रशासनिक अधिकारी अकबर मसूद, डा. राजेश यादव, डा. अखलाक, अफरोज जहां, डॉ. अब्दुल बहाव आदि मौजूद रहे।

मिशन शक्ति पर किया गया ऑनलाइन वेबिनार:

जागरण के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी में महिला सशक्तिकरण पर एक ऑनलाइन वेबिनार भी कराया गया। इसका नाम मिशन शक्ति था। वेबिनार की शुरुआत महिला सेल की अध्यक्ष डॉ. स्वाति सिंह राणा ने की। वेबिनार में डॉ स्वाति ने कहा कि ” जब तक नारी को शिक्षा और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक किसी देश की उन्नति असम्भव है।”

वेबिनार के मुख्य वक्ता डॉ. पुलकित अग्रवाल ने पोक्सो एक्ट पर विचार रखते हुए बताया कि, महिलाओं को अपनो अधिकारों के प्रति पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा होता है जब नाबालिक कम उम्र में बड़ा अपराध कर देते हैं। अगर पकड़ भी लिए जाए तो कानून की आड़ में बच जाते है। वो कहते है कि नवयुवक और युवतियों के लिए एक कानून की महत्ता 1992 में महसूस की गई थी। इस मौके पर जौहर यूनिवर्सिटी के सभी प्रोफेसर उपस्थित रहे।

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Sushma Tomar