दक्षिण एशिया

रोहिंग्या का क़त्लेआम, और म्यान्मार की नृशंसता

रोहिंग्या का क़त्लेआम, और म्यान्मार की नृशंसता

आपने ये बात नोट की होगी कि म्यांमार में हो रहे नरसंहार के सैंकड़ों वीभत्स फोटोज़ और वीडियोस गूगल पर आसानी से उपलब्ध हैं और वहां से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं !
इसके पीछे का मनोविज्ञान भी नृशंस है, ये डर. क़त्लेआम, और नृशंसता की मार्केटिंग है, ठीक जैसे ISIS वाले करते थे, इसके पीछे की रणनीति और सन्देश ये है कि वो जो कर रहे हैं वो एक मुहीम के तहत है, और उनके राष्ट्र हित के लिए बिलकुल सही है, यही उनका राष्ट्रवाद है, शेष विश्व को इसमें टांग अड़ाने की कोई ज़रुरत नहीं है !
इस नफरत को वो बहुसंख्यकों को परोसते हैं, उनसे सहभागिता का आग्रह करते हैं, ये आग्रह का मनोविज्ञान काम करता है, बहुसंख्यकों का मौन समर्थन का ग्राफ धीरे धीरे बढ़ता है, और फिर लोग इनके साथ मुहीम में शामिल भी होने लगते हैं, ये एक ब्रेन वाश किये जाने जैसी प्रक्रिया है, जिसे ‘राष्ट्रवाद के रैपर’ में परोसा जाता है !
इस बेख़ौफ़ नरसंहार की बड़ी वजह है सरकार और सेना से मिला अभयदान, और बहुसंख्यकों का मौन समर्थन और उनकी चुप्पी, और इसके अलावा विश्व में बनायी गयी कृत्रिम इस्लामॉफ़ोबिक लहर के चलते शेष विश्व से न के बराबर प्रतिरोध !
हिटलर ने भी शुद्ध रक्त गर्व को जर्मनी की संस्कृति का आधार बताया था, ठीक इसी तर्ज़ पर म्यांमार में रक्त शुद्धि संस्कृति के नाम पर रोहिंग्या मुसलमानो की लाशों का अम्बार लगाया जा रहा है, साथ हिन्दुओ को भी भगाया जा रहा है !
अपने क्रूर कारनामों के सबूतों को फोटोज़ और वीडिओज़ के ज़रिये ये लोग शेष विश्व को दिखा कर ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वो अपने देश की संस्कृति और राष्ट्रवाद के लिए ये सब कर रहे हैं, उन्हें किसी की परवाह नहीं है !
आप इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं कि इस नरसंहार के सबसे बड़े आरोपी बौद्ध आतंकी अशीन विराथु ने म्यांमार में संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि यांगी ली को ‘कुतिया’ और ‘वेश्या’ कहकर सम्बोधित किया था !
राष्टवाद और रक्त शुद्धि संस्कृति के नाम पर हो रहे इस बड़े नरसंहार पर शेष विश्व को तात्कालिक निर्णय लेना होगा, साथ ही बड़े सूरमा इस्लामिक देशों की मुसलमानो से हमदर्दी की परख का भी यही वक़्त है !!

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