राजस्थान में काँग्रेस आईटी सेल के प्रदेश सह संयोजक सिद्धार्थ भारद्वाज ने एक लेख अपनी फ़ेसबुक वाल पर लिखा है, जिसमें उन्होंने काँग्रेस पर उठने वाले सवालों के जवाब दिए हैं, साथ ही काँग्रेस को समावेशी विचारधारा वाला संगठन बताया है। उन्होंने यह बताने के लिये एक लिस्ट जारी की है। साथ ही भाजपा के संगठन को निरंकुश साशन वाला संगठन करार दिया है। सिद्धार्थ भारद्वाज राजस्थान में सोशल मीडिया के जाने माने चेहरे हैं। फ़िलहाल पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के करीबी हैं।

देखें सिद्धार्थ भारद्वाज ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट पर क्या लिखा है

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक महासागर है जो कि सभी विचारधाराओं का एक समागम है।मौजूदा परिदृश्य में उसे एक हिन्दू विरोधी,मुस्लिम परस्त, देशद्रोही जाने क्या क्या कहा जाने लगा है। सच तो ये है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को न तो उसपर आरोप लगाने वाले समझते है न ही उसकी वकालत करने वाले। मेरी समझ से कांग्रेस सिखाती है की जो आपको पसंद नही है उसका एक अहिंसक दायरे में “विरोध” करो।

विरोध एक नकारात्मक नही बहुत ही सकारात्मक शब्द है जिसके पीछे एक शक्ति है वो है विचार की अभिव्यक्ति अगर विचार की अभिव्यक्ति न हो तो वो एक ज्वालामुखी को जन्म देता है जो कि घातक होता है।

इतिहास उठा कर देख लीजिए भारत में जितने भी दल है वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से ही उपजे है इसका मतलब ये नही की कांग्रेस का विघटन हो रहा है। इसका मतलब ये है कि कांग्रेस में निरंतर “समुद्र मंथन” हो रहा है और विभिन्न रत्न,विष सब निकल रहा है जो ये सिद्ध करता है कि अगर देश और समाज के प्रति चिंतन हो रहा है तो कांग्रेस में हो रहा है बाकी जगह व्यक्ति केवल लकीर का फकीर बना हुआ है।

अब कुछ उदारण बताता हूँ जो आज के परिदृश्य में बहुत महत्वपूर्ण है।

  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कांग्रेस अध्यक्ष महामना मालवीय जी करते है।
  • राष्ट्रीय स्वमसेवक संघ की स्थापना नागपुर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हेडगेवार जी करते है।
  • विश्व हिंदू परिषद की स्थापना भारतीय संविधान के रचयिता कमेटी के सदस्य कांग्रेस,नेहरू जी मंत्री,उत्तर प्रदेश के राज्यपालही के.एम.मुंशी करते है।
  • फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना कांग्रेस के अध्यक्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस करते है।
  • इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की स्थापना संविधान के रचियता कमेटी के अध्यक्ष भारत के प्रथम कानून मंत्री बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ही करते है।
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद जी भी कांग्रेस के ही थे।
  • जामिया मिलिया इस्लामिया विश्विद्यालय की स्थापना भी कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना आज़ाद और क्रांतिकारी अली ब्रदर्स ने की थी।
  • कांग्रेस के शासन में ही भारत के सभी संवैधानिक संस्थानों के चिन्ह “संस्कृत” में लिखे गए।

कुल मिला कर कहने का मतलब ये है कि सांस्कृतिक,राजनीतिक मतभेद होने पर रास्ते अलग हो गए पर मूल विचार कांग्रेसी ही था जिसका मतलब था समग्र,समावेशी, स्वतंत्र, भारत। पंरतु आज के समय में “विरोध” को ” देशद्रोह” के समांतर लिखा जा रहा है।

भाजपा और आरएसएस के हज़ारों संगठन होने के बावजूद वो एक पूंजीवादी शासन के सामने नतमस्तक है उनमें इतनी शक्ति नही की वो गलत नीतियों का विरोध कर सके। क्योंकि कांग्रेस में सत्ता में रहते हुए भी उसको निरंकुश होने से रोकने का साहस मिलता है। पर भाजपा आरएसएस में सत्ता बचाने के लिए “निरंकुश शासन” को सहा जा रहा है।

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Team TH