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कथित “लव जिहाद” के लिए कानून : इरादा दूसरे समुदायों के लिए नफरत बढ़ाने का है – एनसी अस्थाना

कथित “लव जिहाद” के लिए कानून : इरादा दूसरे समुदायों के लिए नफरत बढ़ाने का है – एनसी अस्थाना

मध्यप्रदेश सरकार के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कथित लव जिहाद पर कानून बनाने का जबसे ऐलान किया है, तबसे पूरे देश में इसकी चर्चा ज़ोरों पपर है। फ़िलहाल मध्यप्रदेश में वापस सत्ता में लौटी भाजपा सरकार उग्र हिन्दुत्व के साथ मैदान पर है।

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने 16 नवंबर को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कानून की जानकारी देते हुए कहा

प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने लव जिहाद कानून को लेकर कहा कि इसके तहत गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा और 5 साल तक की कठोरतम सजा का प्रावधान रहेगा वहीं उन्होंने कहा कि लव जिहाद जैसे मामलों में सहयोग करने वालों को भी मुख्य आरोपी बनाया जाएगा और उन्हें अपराधी मानते हुए मुख्य आरोपी की तरह ही सजा होगी. वहीं उन्होंने कहा कि शादी के लिए धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान इस कानून में रहेगा।

रिटायर्ड आईपीएस एनसी अस्थाना ने ट्वीट करके मध्यप्रदेश सरकार के इस क़दम की आलोचना की है, उन्होंने अपने ट्वीट्स में लिखा है –

“ लव जिहाद’ नामक कथा पर कानून बनाना स्पष्ट रूप से बेवकूफी है। राज्य अंतर्जातीय विवाह को नहीं रोक सकता। यदि चिंता किसी भी जोर-जबरदस्ती या छल का इस्तेमाल है, तो उसके लिए पहले से ही आईपीसी में प्रावधान हैं। प्रस्तावित कानूनों का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम लड़कों को परेशान करना है।

शादी के बारे में किसी भी संदेह के लिए आपको न्यायिक मजिस्ट्रेट या हलफनामे से पहले लड़की से एक बयान की आवश्यकता होती है। और कुछ नहीं। राज्य इस बात की सराहना करने में विफल रहता है कि लोग धर्मांतरण करते हैं क्योंकि स्प्लिट मैरिज एक्ट के तहत शादी की प्रक्रिया गंभीर जोखिमों से भरी होती है।

हर साल भारत में लगभग 1 करोड़ विवाहों में से लगभग 36,000 अंतरजातीय विवाह के लिए कानून बनाना हास्यास्पद है। यह केवल वोट बैंक की राजनीति नहीं है। इरादा दूसरे समुदायों के लिए नफरत बढ़ाने का है।

ज्ञात होकी तथाकथित लव जिहाद एक मीडिया प्रोपेगेंडा है, जो कुछ समय पहले मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही पूरे देश में फैलाया गया है। जिसमें ऐसी लव मैरिजेज़ जिसमें लड़का मुस्लिम और लड़की हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन हों, ऐसे लड़कों को निशाना बनाया जाता रहा है। जबकि ऐसे केसेज़ जिसमें मुस्लिम लड़कियां अन्य समुदाय के लड़कों के साथ शादी करती हैं, उन्हे संरक्षण दिया जाता है। इस तरह साफ समझा जा सकता है की यह प्रोपेगेंडा एक समुदाय को टारगेट करके ध्रुवीकरण करके राजनीतिक फायदा लेने की साज़िश है।

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Team TH