आज (05/10/2020) को GST काउंसिल की बैठक है, 2017 में जीएसटी व्यवस्था की शुरुआत के बाद की यह सबसे हंगामेदार बैठक होने जा रही है। केंद्र ने जो जीएसटी मुआवजे पर प्रस्ताव रखा है यदि उस पर विपक्ष शासित राज्यों ने अपना विरोध जारी रखा तो इस मसले पर वोटिंग करानी पड़ेगी, जिससे अब तक कि बचा जाता रहा है। बड़ी बात यह भी है कि नियम के मुताबिक किसी भी तरह के प्रस्ताव को पास कराने के लिए कम से कम 20 राज्यों की सहमति जरूरी है, इसीलिए ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे गैर बीजेपी गैर कांग्रेसी राज्यों का रुख इस बैठक में बेहद अहम साबित होगा।

अब विवाद किस बात पर है वह भी समझ लीजिए, केंद्र और राज्यों के बीच तय समझौते के अनुसार अगर राज्यों के जीएसटी राजस्व में 2015-16 की तुलना में हर साल 14 प्रतिशत वृद्धि नहीं होती है तो उन्हें पांच साल तक मुआवजा दिया जाता रहेगा।यह व्यवस्था 2018 के मध्य से ही गड़बड़ाने लगी थी, लेकिन अब कोरोना के कारण केंद्र और राज्यों की कमाई काफी घट गई है। अब मोदी सरकार कह रही है कि वो वादा भूल जाइए ! मोदी सरकार ने बढ़ी हुई मुआवजा रकम देने से साफ इंकार कर दिया है, उसका कहना है कि जो रकम कम हो रही है वह राज्य बाजार से कर्ज के रूप में उठाए, और राज्यों का कहना है कि यह काम केंद्र करे। जो कि सही बात है।

केंद्र के पास उधार लेने की अधिक क्षमता है। वह अधिक कर्ज देने की क्षमता रखता है।’ हर राज्य की वित्तीय क्षमता सीमित है, उस पर पहले से ही कर्ज का बोझ है।  केंद्र सरकार को राज्यों की तुलना में कम ब्याज पर कर्ज मिल सकता है, अगर राज्य उच्च ब्याज दरों पर उधार लेते हैं, तो यह उपकर को अनावश्यक रूप से प्रभावित करेगा और अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक बात और है कि मोदी सरकार के प्रस्ताव के अनुसार यदि राज्य मान जाते हैं तो राज्य उधारी के लिए हड़बड़ी मचाएंगे अगर सभी राज्य बाजार में पहुंच जाएंगे तो बॉन्ड प्रतिफल एकाएक चढ़ जाएगा।

सही यही होगा कि केंद्र सरकार राज्यों को बाजार से अलग-अलग से उधार लेने के बजाय खुद जरूरत के हिसाब से उधार ले, छह गैर-भाजपा शासित राज्यों- पश्चिम बंगाल, केरल, दिल्ली, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने केंद्र को पत्र लिखकर राज्यों द्वारा कर्ज लेने के विकल्प का विरोध किया है।

ममता बनर्जी ने तो वित्त मंत्रालय को लिखी अपनी चिट्ठी में कहा कि 2013 में बीजेपी ने जीएसटी का जिस वजह से विरोध किया था, आज वो खुद वही काम कर रही है। उन्होंने लिखा, ‘2013 में बीजेपी के विरोध का बस अकेली वजह यही थी कि वो तत्कालीन सरकार पर जीएसटी मुआवजा भरने को लेकर भरोसा नहीं करती थी, आज जब हम इसी वजह से केंद्र की बीजेपी सरकार से भरोसा खो रहे हैं तो उनके (पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली) के वो शब्द हमारे कानों में बज रहे हैं। ‘ उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के बजाय अगर केंद्र उधार लेता है, उसे कम ब्याज दर पर कर्ज मिल जाएगा।

राज्यों के पास आमदनी के बहुत कम सोर्स बचे हुए हैं ऐसे में उन पर ही लोन लेने का बेजा दबाव बनाया जा रहा है, हमे ये समझना होगा कि यदि राज्यों को यह लोन लेने पर मजबूर किया गया तो वह राज्य की जनता से ही एक्स्ट्रा सेस वसूलेंगे जिससे जनता पर सीधा बोझ पड़ेगा, यानी आपको ओर हमको ही मोदी सरकार की इस बड़ी गलती का भुगतान करना होगा।

 

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Gireesh Malviya

गिरीश मालवीय एक विख्यात पत्रकार हैं, जोकि आर्थिक क्षेत्र की खबरों में विशेष रूप से गहन रिसर्च करने के लिए जाने जाते हैं। साथ ही अन्य विषयों पर भी गिरीश रिसर्च से भरे लेख लिखते रहते हैं।

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