राजनीति

मायावाती पर भड़क गए भाजपा के दलित नेता.

मायावाती पर भड़क गए भाजपा के दलित नेता.

जैसे जैसे यूपी चुनाव करीब आ रहे हैं वैसे वैसे ही माहौल में राजनीतिक गर्मी बढ़ती जा रही है फिर चाहें वो एक दूसरे पर बयानों से हमले हो या फिर दावे और वादे हो,इन सभी हथियारों को राजनीतिक दल अपना रहे हैं और सियासी पिच तैयार कर रहे हैं।

अब कल बसपा ने एक नया दांव खेला है,बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र अयोध्या में ब्राह्मण सम्मेलन कर आये हैं,वो “राम जन्मभूमि” पर पूजा अर्चना का कार्यक्रम करके लौट आये हैं,उन्होंने वहां भाजपा पर भी निशाना साधा है,लेकिन इसके बाद वो आलोचको के निशाने पर भी आ गए हैं।

बहन जी पर भड़क गए चेयरमैन साहब

यूपी अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामबाबू हरित ने बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा है कि “बहुजन समाज पार्टी कुछ भी कर ले अब उसकी नींव हिल चुकी है,क्योंकि तीन बार जब हमारा उनको सहयोग रहा हम खुद उस समय विधायक थे,हमने वोट दिया, अपना मत दिया तब उनको मुख्यमंत्री बनाया था.

मायावती जी को उस समय तो हमारा और हमारी पार्टी का दबाव रहता था तो उन्होंने अनुसूचित जाति जनजाति और जो भी गरीब पिछड़े लोग हैं उनके कल्याण के लिए कार्य किया”

आगे वो कहते हैं कि “लेकिन जैसे ही 2007 में उनकी खुद की सरकार आई तो उन्होंने उस सरकार में कोई ऐसा काम नहीं करके दिखाया जो कि गरीब और पिछडी जनता को इस प्रदेश के लोगों को कोई फायदा मिल सके”

अध्यक्ष जी यहां ही नहीं रुके

डॉ हरित ने तो बसपा के ब्राह्मण सम्मेलन को निशाने पर ले लिया और पूरी पार्टी की नीयत और नीति को टारगेट कर दिया है,उन्होंने अपने दिए गए बयान में ये कहा है कि-

“ब्राह्मण तो इनके साथ जुड़ी नहीं सकते, ब्राह्मण तो हमारे साथ रहेंगे. क्योंकि यह समाज बुद्धिजीवी है, यह जानता है कि देश का भला कौन कर सकता है,आज हमारे विश्व स्तर के नेता हैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।

जिस प्रकार से उन्होंने भारत में ही नहीं पूरे दुनिया में भारत की स्थापना, भारत का सशक्तिकरण दिखाया है और हमारे योगी जी प्रदेश के मुख्यमंत्री जिस प्रकार से कार्य कर रहे हैं, इससे पढ़ा-लिखा समाज सब कुछ समझता है कि भला इसी से हो सकता है”

दरअसल बसपा ने नई नीति अपनाते हुए ब्राह्मणों को साधने की रणनीति अपनाई है,ओर वो राज्य भर में ब्राह्मण सम्मेलन कर रही है, जिससे उसकी चौतरफा आलोचना हो रही है,लेकिन बसपा 2007 की तरह नीति बना रही है,देखना ये है कि वो कितना कामयाब हो पाती हैं।

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Team TH