केरल – बाढ़ से मरने वालों की संख्या 300 पार

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केरल में लगातारी जारी बारिश की वजह से आई बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है. स्थितियां ऐसी हैं कि राज्य के चार ज़िलों में स्थिति ख़तरनाक स्तर पर पहुंच गई है. यहां कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है कि अब तक 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इतना ही नहीं इस राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी और पेट्रोल पंप में ईंधन की कमी से संकट और भी गहराता नजर आ रहा है. इस बात की जानकारी खुद अधिकारियों ने दी है.
इस प्रलयंकारी बाढ़ ने इस प्राकृतिक छटा वाले राज्य को झकझोर कर रख दिया है. इसके चलते इस राज्य का टुरिज्म इंडस्ट्री भी बर्बाद हो गया है, फसलें तबाह हो गयी हैं और बुनियादी ढांचे को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है.
बारिश से केरल में तबाही, मरने वालों की संख्या बढ़कर 173 हुई
राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) ने केरल में करीब एक सदी में आई सबसे भीषण बाढ़ की वजह से तेजी से बिगड़ती स्थिति की समीक्षा के लिए नयी दिल्ली में बैठक की. कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा की अध्यक्षता में हुई बैठक में थल सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुखों के अलावा, गृह, रक्षा सचिवों समेत अन्य शीर्ष अधिकारियों ने शिरकत की.
राज्य में राहत बचाव का कार्य जारी है. एनडीआरएफ के अलावा सेना, नौसेना, वायुसेना के कर्मियों ने बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित इलाकों में अपने-अपने घरों की छतों, ऊंचे स्थानों पर फंसे लोगों को निकालने का कार्य कर रहे हैं.

ऊंचाई वाले इलाकों में पहाड़ों के दरकने के कारण चट्टानों के टूटकर नीचे सड़क पर गिरने से सड़कें बंद हो गयीं हैं जिससे वहां रहने वालों और गांवों में बचे लोगों का संपर्क बाकी की दुनिया से कट गया है. ये गांव आज किसी द्वीप में तब्दील हो गये हैं.
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत सैकड़ों लोग ऐसी जगहों पर फंसे हैं जहां नौका से पहुंच पाना मुश्किल है. उन लोगों को रक्षा मंत्रालय के हेलीकॉप्टर की मदद से निकाला जा रहा है और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.

कल प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को नौसेना के हेलीकॉप्टर में एक रस्सी के सहारे ऊपर पहुंचाया गया. अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान महिला की एमनियोटिक थैली फट गयी थी और ऑपरेशन के लिये उसे नौसेना अस्पताल भेजा गया, जहां उसने बेटे को जन्म दिया. जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं
इंडियन एक्सप्रेस ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि कोच्चि और अंगमाली के पास अलुवा में सैंकड़ों लोग विभिन्न अपार्टमेंट में फंसे हुए हैं. वहीं कलेडी के श्री शंकराचार्य विश्वविद्यालय के हॉस्टल में 300 छात्र फंसे हुए हैं.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने राहत एवं पुनर्वास प्रयासों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के मक़सद से 30 नवंबर तक भारत निर्मित विदेशी शराब पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से बात की और स्थिति से निपटने में केंद्र की मदद का उन्हें आश्वासन दिया.
पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘हमने राज्य में बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की. रक्षा मंत्रालय से कहा है कि राज्य में बचाव एवं राहत अभियानों को और बढ़ाए. केरल के लोगों की सुरक्षा और सलामती की प्रार्थना करता हूं.’
मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन रक्षा मंत्री निर्माला सीतारमण से भी बात की और बताया कि हालात लगातार ‘‘गंभीर’’ होते जा रहे हैं. 50,000 से अधिक परिवारों से 2.23 लाख लोग राहत शिविरों में शरण लिये हुए हैं.

कुछ जगहों पर बारिश थोड़ी थमी है लेकिन पथनमथिट्टा, अलपुझा, एर्नाकुलम और त्रिशूर जिले अब भी मानसूनी संकट से जूझ रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि एर्नाकुलम जिले में कई निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी हो गयी है जिसके चलते अधिकारियों ने मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया. अस्पतालों में पानी घुस जाने के कारण कई मरीजों को वहां से निकाला गया.
राहत शिविरों में रह रहे लोगों ने भी बाढ़ के खतरे और पेयजल की कमी की शिकायत की. राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम जैसे स्थानों में कुछ पेट्रोल पंपों में ईंधन की कमी दिखी. तिरुवनंतपुरम जिले में कई पेट्रोल पंपों में मोटरचालकों की लंबी-लंबी कतारें दिखीं. अधिकारियों ने पेट्रोल पंपों को निर्देश दिया है कि वे राहत अभियानों के लिये अपने पास हर वक्त 3000 लीटर डीजल और 1000 लीटर पेट्रोल अपने पास बचाकर रखें.
अलुवा, कालाडी, पेरुम्बवूर, मुवाट्टुपुझा एवं चालाकुडी में फंसे लोगों को निकालने के कार्य में मदद के इरादे से स्थानीय मछुआरे भी अपनी-अपनी नौकाएं लेकर बचाव अभियान में शामिल हुए हैं. कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रनवे पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण विमानों का परिचालन बंद है. सूत्रों ने बताया कि कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है और उनके समय में परिवर्तन किया गया है. बहरहाल अब तक कोच्चि मेट्रो की सेवाएं बाधित नहीं हुई हैं.

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए केरल सरकार द्वारा गठित उपसमिति से कहा कि मुल्लापेरियार बांध का जल स्तर तीन फुट कम करने की संभावनाओं को तलाशा जाए.
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने केरल और तमिलनाडु सरकार से कहा कि विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और बांध का जलस्तर 142 फुट से घटाकर 139 फुट करने के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति के निर्देशों का पालन करें.

पीठ ने कहा कि वह इस तरह की गंभीर प्राकृतिक आपदा से निपटने में विशेषज्ञ नहीं है और आपदा पर काबू पाने का मामला कार्यपालिका पर छोड़ रही है. शीर्ष अदालत ने केरल सरकार को आपदा प्रबंधन और पुनर्वास उपायों के बारे में उठाए गए क़दमों पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.
मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश एवं तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है. रिपोर्ट के अनुसार पथनमथिट्टा, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलपुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड जिलों में 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है.