एनसीपी के बागी नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को भाजपा के साथ आने के कुछ घंटों के बाद ही बड़ी राहत मिली है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने उन्हे सिंचाई घोटाले से संबंधित 9 मामलों में क्लीन चिट दे दी है। जिसके बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया में अजीत पवार को मिली क्लीन चिट चर्चा का विषय बनी हुई है।
ज्ञात होकि जब 2014 में देवेन्द्र फड़नवीस मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने जो सबसे पहली फाईल साईन की थी। उसमें उन्होंने अजीत पवार के खिलाफ 70 हज़ार करोड़ के घोटालों की जांच के आदेश दिए थे। फिलहाल 2019 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना द्वारा 50-50 की मांग पर अड़े रहने के बाद भाजपा और शिवसेना का गठबंधन टूट गया था। जिसके बाद शुरू हुए सियासी संकट के बाद 23 नवंबर को सुबह 6 बजे से पहले राज्यपाल द्वारा देवेन्द्र फड़नवीस और अजीत पवार को आनन फानन में शपथ दिला दी गई थी।
इस घटनाक्रम के बाद से ही, भाजपा और फड़नवीस पर सोशल मीडिया में यह कहकर हमला किया जा रहा था। कि उन्होंने ने उसी अजीत पवार के साथ सरकार बनाई है, जिसके बारे में वो कहते थे कि अजीत पवार 2019 के चुनावों के परिणाम के बाद जेल में होंगे। पर जैसे ही सिंचाई घोटाले से संबंधित 9 केसेज़ को एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा बंद किया गया। अजीत पवार और भाजपा के बारे मीम और टिप्पणियाँ वायरल होने लगे।

सिंचाई घोटाले से संबंधित 9 केस बंद किये जाने पर किसने क्या ट्वीट किया

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Team TH

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