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क्यों मनाया जाता है आज के दिन इंजीनियर दिवस?

क्यों मनाया जाता है आज के दिन इंजीनियर दिवस?

हमारे देश में लगभग हर दूसरे दिन किसी न किसी चीज का दिवस मनाया जाता है। अगर बात की जाए आज 15 सितंबर की, तो आज के दिन भारत में अभियंता दिवस (Engineer’s Day)  मनाया जाता है। इस दिन देश के तमाम अभियंताओं (Engineer) को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस दिन डॉ. एम विश्वेश्वर्या (M. Vishveshwarya) का जन्मदिवस होता  है। और डॉ. एम विश्वेश्वर्या के जन्मदिन को हमारे देश में इंजीनियर दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें भारत में इंजीनियरिंग को ऊंचाइयों तक पहुंचाने का श्रेय दिया जाता है। इन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान, भारत रत्न भी दिया गया था।  सरकार ने 1968 में उनके इस जन्मदिवस को अभियंता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

कौन थे एम विश्वेश्वर्या?

डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वर्या (Dr. Mokshagundam Visvesvaraya) का जन्म 15 सितंबर 1860 को एक तेलगु परिवार में हुआ था। 1880 में उन्होंने बीए (BA) में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। मैसूर, कर्नाटक को विकसित करने के पीछे विश्वेश्वर्या का ही हाथ रहा है। उन्हें कर्नाटक (Karnatka) के भागीरथ के नाम से भी जाना जाता है। महज 34 साल की उम्र में उन्होंने सुक्कुर कस्बे को सिंधु नदी (Sindhu River) से पानी आपूर्ति कराने के लिए प्लान तैयार किया था।

1947 के पहले विश्वेश्वर्या ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली थी। जैसे उनको कृष्णराजसागर बांध (Krishnaraj Sagar Dam), भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स (Bhadrawati Iron and Steel Works) , मैसूर समेत कई अन्य विशाल परियोजनाओं का जनक माना जाता है। उन्होंने मूसा और इसा नाम की नदियों के पानी को बांधने का भी प्लान तैयार किया था। उन्होंने कई सारे बांध (Dams) बनाए थे। इसके बाद ही उन्हें मैसूर का चीफ इंजीनियर ( Chief Engineer) नियुक्त किया गया था।

शिक्षा के क्षेत्र में भी है अहम योगदान 

मोक्षगुंडम विश्वेश्वर्या शिक्षा को बहुत अधिक महत्व देते थे। जिस आर्थिक परेशानी और शिक्षण संस्थानों का अभाव उन्होंने अनुभव किया था, वह नहीं चाहते थे कि किसी अन्य विद्यार्थी को ऐसा दिन देखना पड़े। जब तक वह मैसूर में चीफ इंजीनियर रहे, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी कई कार्य किए।

विश्वेश्वर्या के कार्यकाल में राज्य में स्कूलों की संख्या 4,500 से बढ़कर 10,500  हो गई थी। लड़कियों के लिए उन्होंने अलग से कई स्कूल और हॉस्टल (Hostel) खुलवाए। साथ ही पहला फर्स्ट ग्रेड कॉलेज (First Grade College), महारानी कॉलेज (Maharani College) भी विश्वेश्वर्या ने ही खुलवाया था। उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय (Mysore University) की भी स्थापना की थी।

विश्वेश्वर्या स्टील प्लांट 

इंजीनियरिंग की दुनिया में आयरन और स्टील का सबसे अधिक महत्व है। एम विश्वेश्वर्या ने विश्वेश्वर्या लोह एवं इस्पात संयंत्र (Vishveshwarya Iron and Steel Plant) की स्थापना 1923 में भद्रावती नदी के पास की थी। इसकी भौगोलिक स्थिति काफी समृद्ध है। कंपनी को लोहा ‘बाबा बुदन की पहाड़ी’, कर्नाटक से मिल जाता है और बिजली ‘शरावती परियोजना’, कर्नाटक से मिल जाती है। गौरतलब है कि हाल ही में इस प्लांट को फिर से शुरू करने और विश्वेश्वर्या को सम्मान देने के लिए सेल (SAIL) ने इसे अपनी यूनिट बनाई है।

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Ankit Swetav