एक ख़बर कांग्रेस के ताल्लुक से मीडिया में आई है, कि पिछले पांच महीने से केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालयों को चलाने के लिये एक भी पैसा नहीं भेजा गया है. ऐसा अनुमान है कि कांग्रेस इस समय बुरे वित्तीय संकट से गुजर रही है.
NDTV में छपी ख़बर के अनुसार – नाम न बताने की शर्त पर पार्टी के एक अधिकारी ने बताया है कि कांग्रेस की ओर से खर्चों को कम करने और मदद के लिए आगे आने की अपील की गई है. मिली जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी की अगुवाई में चल रही कांग्रेस के पास उद्योगपतियों की ओर से मदद तो आ रही है लेकिन वह काफी कम हो गई है. नगदी की समस्या से जूझ रही पार्टी को प्रत्याशियों की मदद के लिये अब जनता के चंदे के पैसा का सहारा लेना पड़ सकता है.​
बताया जाता है, कि बीजेपी की तुलना में कांग्रेस को चुनावी बांड से ज्यादा पैसा नहीं आ रहा है. पार्टी को पैसा जुटाने के लिए अब ऑनलाइन फंडिंग का सहारा लेना पड़ सकता है. इस मामले में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है.
NDTV के अनुसार – दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ मिलन वैष्णव का कहना है कि बड़े बिजनेस घराने अब कांग्रेस से बीजेपी की ओर पलायन कर गए हैं. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 को देखते हुए बीजेपी को पैसा जुटाने में निर्णायक फायदा हुआ है. इसकी वजह यह यह है.
कांग्रेस और दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों को व्यापार जगत में उनको ज्यादा ‘दोस्त’ के तौर पर नहीं देखा जाता है.  मार्च 2017 में खत्म हुए वित्तीय साल तक बीजेपी ने जितना फंड इकट्ठा किया था कांग्रेस उसका एक चौथाई ही जुटा पाई है.

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