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मध्य एशिया में भारतीय संस्कृति जैसा यह कौन-सा देश है?

मध्य एशिया में भारतीय संस्कृति जैसा यह कौन-सा देश है?

भारत अपनी संस्कृति के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। यहाँ का लज़ीज खाना, प्रचीन इमारतों की बनावट और शादी समारोह की रस्मों रिवाज से लेकर सब कुछ विश्व में काफी मशूहर है। लेकिन अब भारतीय संस्कृति से मिलता-जुलता एक और देश दुनिया के लिए खुल चुका है। हो सकता है कि आपने इस देश का नाम दुनिया के नक्शे और किताबों में देखा या पढ़ा हो, लेकिन यह देश आज से तीन साल पहले ही बाहरी लोगों के आने-जाने के लिए खुला है।

मध्य एशिया में स्तिथ यह देश और कोई नहीं बल्कि उज्बेकिस्तान है। अब  यहां के लोग बाहें फैला कर बाहरी लोगों का स्वागत कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि दुनियाभर से यहाँ लोग आएं और उनकी संस्कृति, कला और अर्किटेक्चर लुत्फ उठाएं।

भाईचारे की मिसाल है उज्बेकिस्तान 

उज़्बेकिस्तान वैसे तो एक मुस्लिम बहुल देश है लेकिन यहाँ यहूदी भी अच्छी खासी संख्या मे रहते हैं। यहाँ कई ऐसे यहूदी कब्रिस्तान हैं जहां की देखरेख करने वाले मुखिया मुस्लिम हैं। Nas Daily की एक रिपोर्ट के मुताबिक उज्बेकिस्तान की एक बड़ी मस्जिद के पास एक यहूदी कब्रिस्तान है। इतना ही नहीं, यहाँ के डायरेक्टर (देखरेख करने वाले मुख्य व्यक्ति) जहाँगीर खुद एक मुस्लिम हैं। इसके अलावा यहुदी मुस्लिम बहुल इलाके में निश्चिंत होकर अपनी प्रार्थना कर सकते हैं। गौरतलब है कि उज़्बेकिस्तान में हज़ारों की संख्या में मकबरे, मस्जिदें और मीनारों भी है। यह इमारते बेहद खूबसूरत और आकर्षित करने वाली है।

देश का पर्यटन बढ़ाना चाहता है उज्बेकिस्तान 

26 सालों तक “इस्लाम करीमोव” के निरंकुश शासन में रहने वाला उज़्बेकिस्तान अब बदल रहा है। यहाँ पहले से ज़्यादा धार्मिक स्वतंत्रता है।

उज़्बेकिस्तान में हज़ारों की तादाद में मौजूद तीर्थस्थानों के कारण इसे मिनी मक्का भी कहा जाता है। उज़बेक पर्यटन समिति के डिप्टी हेड अब्दुल अज़ीज़ अक्कूलोव के मुताबिक 2017 में 90 लाख उज़बेक नागरिकों ने तीर्थयात्रा कर इन मकबरों तक पहुंच की। 

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान सरकार भारत,पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य देशों के लोगो को उज़्बेकिस्तान में पर्यटकों के रूप में देखता है। लेकिन,अभी तक उज्बेकिस्तान में इन्हें देखने वालों की संख्या में कोई खास इज़ाफ़ा नहीं हुआ है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मानें, तो साल 2017 में केवल 20 लाख विदेशी पर्यटक ही उज्बेकिस्तान घूमने पहुंचे थे। हालांकि, बीते तीन सालों में उज़्बेकिस्तान सरकार ने पर्यटन के मामले में नियम कायदों में काफी ढील दी है। 

वर्तमान राष्ट्रपति ने धर्मिक स्वतंत्रता का अपनाया रास्ता

लंबे समय से उज़्बेकिस्तान ने अन्य देशों के लिए अपने दरवाजे बंद किये हुए था। लेकिन कुछ सालों में पर्यटन को देश मे बढ़ावा देने के लिए इन्हें खोल दिया गया है। दूसरी ओर पर्यटन को बढ़ाने के लिए वीज़ा की कई शर्ते को भी आसान बना दिया गया है। 2016 के बाद  अब किसी भी देश का व्यक्ति उज़्बेकिस्तान में घूमने जा सकता है। 

साल 2016 में “इस्लाम करीमोव” की मृत्यु के बाद वहां वर्तमान राष्ट्रपति शवक़त मिर्ज़ियोयेव सत्ता में आए। जिसके बाद  उन्होंने अधिक धार्मिक स्वतंत्रता और पर्यटन के लिए के रास्ते को अपनाया।  

प्राचीन और अनूठा है यहाँ का अर्किटेक्टर 

उज़्बेकिस्तान के शहर टर्मेज़ ओटा की स्थापत्यकला सोइयो साल पुरानी और अनूठी है।इमारतों के शीर्ष पर मौजूद गुम्बद इस्लामिक वास्तुकला को प्रदर्शित करता है, वहीं राजधानी ताशकंद के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सोवियत संघ की छाप आज भी है।

उज़्बेकिस्तान में पर्यटन स्थलों की बात की जाए तो चरवाक झील जो ताशकंद के बाहरी छोर पर स्थित है। ये लोगो के लिए समुद्र के समान है क्योंकि उज़्बेकिस्तान चारों और से अन्य देशों से घिरा हुआ देश है। अन्य स्थलों में समरकंद विश्वविख्यात है। वहीं नामागंन की हरियाली और बहती धाराए मन मोह लेने वाली हैं।

जूनून की हद तक पसन्द किया जाता है ये स्ट्रीट फूड:

उज़्बेकिस्तान की सड़कों पर मिलने वाला स्ट्रीट फूड देखने मे काफ़ी हद तक भारतीय खाने जैसे मिर्च मसाले से लबरेज उज्बेकिस्तान का खाना भारतीयों जैसा ही है। लेकिन इसका स्वाद भारत और बाकी देशों से इसे थोड़ा-सा अलग होता बना देता है। 

यहाँ सबसे स्ट्रीट फूड में सबसे ज़्यादा “प्लोव” नाम के स्ट्रीट फूड को पसंद किया जाता है। जो कुछ देखने में पुलाव और बिरीयानी की तरह लगता है। यह पुलाव जैसा ही होता है लेकिन यह प्लोव चावल,अंडा,मास और मसालों से मिलकर बनाया। यह  एक ऐसा व्यंजन है जो उज़बेक नागरिकों और पर्यटनों को काफ़ी लुभाता है। लोग इसे जुनून की हद तक पसंद करते हैं। नियमों में कटौती कर उज़्बेकिस्तान खुद को मध्य एशिया में एक पर्यटन स्थल के तौर पर स्थापित कर अपना देश की विदेशी मुद्रा में इजाफा करना चाहता है। ताकि उज्बेकिस्तान की अन्य समस्याओं (सड़क, कनेक्टीविटी, इंटरनेट आदि) को खत्म करने में सहायता मिल सके। 

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Sushma Tomar