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क्या हैं राम की नगरी में कांग्रेस की जीत के मायने

क्या हैं राम की नगरी में कांग्रेस की जीत के मायने

मध्यप्रदेश के चित्रकूट में विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के कई मायने निकाले जा रहे हैं. जहां कुछ राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं. कि ये मध्यप्रदेश में भाजपा के गिरते ग्राफ़ का प्रमाण है, तो वहीं कुछ लोग इसे मोदी सरकार के फैसलों से नाराज़गी के तौर पर पेश आकर रहे हैं. वहीं एक तबका ऐसा भी है, जो ये कह रहा है कि कांग्रेस अपने पिछले विधायक की अच्छी छवि के कारण जीती है. इस परिणाम पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने प्रतिक्रिया देते हुए उसे कांग्रेस की परम्परागत सीट बताया है.
ज्ञात हो कि चुनाव प्रचार के दौरान चित्रकूट विधानसभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक गाँव में रात व्यतीत की थी. कई दिनों तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस चुनाव की तैयारी एवं प्रचार में लगे हुए थे. वोटर्स को लुभाने एवं भगवा तड़का लगाने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पूरी शिद्दत के साथ यूपी की सीमा से लगे मध्यप्रदेश की चित्रकूट विधानसभा में प्रचार किया. पर शिवराज और योगी के राज , दोनों को ही चित्रकूट की जनता ने नकार दिया.
इस सीट में कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी ने बीजेपी के उम्मीदवार शंकरदयाल त्रिपाठी को 14 हजार 133 वोटों से हराया है. पिछले तीन उपचुनावों में कांग्रेस की यह लगातार दूसरी और 14 साल में हुए चार चुनावों में सबसे बड़ी जीत है. 2003 में कांग्रेस के प्रेमसिंह इस सीट पर 8799 वोटों से जीते थे. इसके बाद 2008 में भाजपा के सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने प्रेम सिंह को 722 वोटों से हराया था. 2013 में मोदी लहर के बावजूद इस सीट पर प्रेम सिंह फिर विजयी हुए. उन्होंने गहरवार को 10970 वोटों से हराया था. 29 मई 2017 को उनके निधन के कारण यह उपचुनाव हुआ था। इससे पहले इसी साल अप्रैल में अटेर उपचुनाव में कांग्रेस के हेमंत कटारे और 2014 में बहोरीबंद में सौरभ सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया था.

इस उपचुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चित्रकूट का कई बार दौरा किया. योगी के इस दौरे को सियासी पंडित एक तीर से दो निशाना साधना मान रहे थे. पहला तो यहां होने वाला उपचुनाव था. दूसरा, योगी का चित्रकूट दौरा अयोध्या के ठीक बाद था. योगी ने चित्रकूट के कामदगिरी मंदिर की पांच किलोमीटर की परिक्रमा में भी हिस्सा लिया था. योगी ने छोटी दिवाली पर अयोध्या में तो रविवार को चित्रकूट में दीपोत्सव किया और मंदाकिनी किनारे महाआरती भी की. माना जा रहा कि हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ते हुए योगी भगवान राम से जुड़ी धार्मिक नगरी अयोध्या के बाद चित्रकूट का दौरा कर 2019 की तैयारी कर रहे हैं. यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या भी चित्रकूट में प्रचार कर चुके थे.
चुनाव नतीजों के बाद स्थानीय लोगों ने खुल कर कहा कि वे शिवराज सिंह चौहान सरकार से संतुष्ट नहीं हैं. वे बदलाव चाहते हैं. उन्होंने भाजपा को भी महज वादे करने और नारे देने वाली पार्टी बताया. पिछले कुछ महीनों में मध्यप्रदेश में कई जगह सत्ता के खिलाफ लोगों में आक्रोश फूटता दिखा. फसल बीमा, फसलों की उचित कीमत न मिल पाने और फिर औद्योगिक इकाइयों के लिए मनमाने तरीके से कृषि योग्य भूमि के आबंटन से लोगों में नाराजगी दिखाई दी. उसमें आंदोलन कर रहे लोगों पर सरकार ने गोलियां चलवाई थी, जिसमें कई किसान मारे गए थे. व्यापमं घोटाले और उसमें रहस्यमय ढंग से मारे गए लोगों के मामले को दबा दिए जाने से भी बहुत से लोगों में नाराजगी है.
किसान, किसानी और खेती को अपनी प्राथमिकता बताने वाले शिवराज सिंह किसानों के साथ न्याय नहीं कर सके. मंदसौर में अपना वाजिब हक मांग रहे किसानों पर फायरिंग से उनकी खूब किरकिरी हुई. शिवराज ने प्रदर्शन में हिंसा भड़काने का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा था. जलते प्रदेश में शांति बहाली के लिए उन्होंने शांति व्रत भी रखा, लेकिन निहत्थे किसानों पर फायरिंग का उन्हें चुनाव में नुकसान हो सकता है.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सारी कोशिशों पर पानी फिर गया है. 2018 में मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चित्रकूट उपचुनाव को लिटमस टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा था. इस उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की रिकॉर्ड 14135 वोटों से जीत भाजपा के लिए चिंता का सबब बन सकती है. शिवराज सिंह के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ ने भी इस सीट पर जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रखी थी. बीजेपी की यह हार कांग्रेस के लिए संजीवनी से कम नहीं. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह जीत कांग्रेस कैडर के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर लेने जैसी ही है.

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