राजस्थान

लोकतंत्र के जनप्रतिनिधियों के बारे में क्या बोले सीपी जोशी?

लोकतंत्र के जनप्रतिनिधियों के बारे में क्या बोले सीपी जोशी?

सोमवार को विधानसभा में एक सेमिनार (Seminar) का आयोजन किया गया। यह आयोजन विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी (Dr. CP Joshi) के पहल का परिणाम था। इस सेमिनार का मूल विषय था, ‘संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना और लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से जनता की क्या अपेक्षाएं होती है?’ सेमिनार में नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) और गुलाबचंद कटारिया (Gulab Chand Kataria) जैसे कई बड़े केंद्र मंत्री भी शामिल हुए।

जनता की नेताओं से उम्मीद बढ़ी – सीपी जोशी

विधानसभा के अध्यक्ष और राजस्थान विधानसभा के सदस्य डॉ. सीपी जोशी ने अपने विचार रखे। उन्होंने अपने बयान में कहा, “लोगों की नेताओं और जनप्रतिनिधियों से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। आज के शिक्षित दौर में गांव का एक व्यक्ति यही उम्मीद करता है कि विधायक जी हमारे नाली और सड़के बनाएंगे। केंद्र कितनी भी अच्छी नीति बनाएं, उसे राज्य को स्वीकार किए बिना कुछ नहीं होगा। राज्य की नीतियों को पंचायत स्तर पर सही से पहुंचाना चाहिए।”

उन्होंने आगे अपनी बात को रखते हुए कहा, “80 के दशक से पहले गांव के लोग सरपंच साहब कहते थे लेकिन अब सिर्फ सरपंच कहते हैं। फंड की कमी से पंचायत चुनाव काफी प्रभावित भी होते है। जनता की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच ज़मीनी स्तर पर काम होना जरूरी है।”

राजनेताओं का सकारात्मक होना जरूरी – नितिन गडकरी

सेमिनार को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि “आप किसी को नेत्रदान जरूर कर सकते हैं, मगर नजरिया नहीं दे सकते हैं। राजनेता सकारात्मक और विकासवादी नजरिए के साथ आगे नहीं बढ़ेंगे तो लोकतंत्र में जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाएंगे।”

अपने बयान की शुरुआत उन्होंने संगठन और विचारधारा की श्रेष्ठता पर बोलते हुए की। उन्होंने कहा, “जब व्यक्ति और संगठन की बात आती है तो उसमें संगठन श्रेष्ठ होता है, जबकि संगठन और विचारधारा की बात आती है तो विचारधारा श्रेष्ठ होती है। विचारधाराओं का सम्मान करना ही हमारे देश के लोकतंत्र की आत्मा है।”

हमारा एक ही लक्ष्य, देश और जनता की भलाई – गुलाबचंद कटारिया

भाजपा के केंद्रीय कार्य समिति के सदस्य और राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी इस विषय पर अपने विचार सबके सामने रखे। उनके मुताबिक, ” स्पीकर सीपी जोशी ने पहली बार इस विषय को जीवंत किया है। संसदीय प्रणाली से बेहतर कुछ नहीं होता है। हमारा एक ही लक्ष्य है, देश और जनता की भलाई करना। कभी भी आम चुनावों के नाम पर हिंसा ना होना बहुत बड़ी बात है।”

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Ankit Swetav