Umar पे गोली से हमला करना फ़ासीवादियों  की बौखलाहट को दर्शाता है. मुंबई में हुई आतंकी गिरफ्तारियों से इनके इरादे समझ सकते हैं आप. ये नया नहीं है, महात्मा गांधी की हत्या से लेकर पंसारे, दाम्भोलकर और गौरी लंकेश की हत्या तक इन संघियों का यही चरित्र रहा है. खैर अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने उमर को बाल बाल बचाया. पर सोचियेगा, कि हर आवाज़ उठाने वाले के खिलाफ़ ये पैटर्न क्यों अपनाया जा रहा है.

ये एक डर आपके दिमाग में बैठाना चाहते हैं, कि देखो खामोश हो जाओ. ज़्यादा सवाल जवाब मत करो. नहीं तो तुम्हे गौरी लंकेश, दाम्भोलकर और गोविन्द पंसारे की तरह मार दिया जायेगा. वो चाहते हैं कि आप आवाज़ उठाना बंद कर दें. वो चाहते हैं कि आप अन्याय के विरुद्ध अपनी ज़ुबानों को सिल लें.

ज़रा सोचियेगा उन्हें Umar Khalid से दिक्कत क्या है? यही दिक्कत है न कि उमर आवाज़ उठाता है. किसके लिए उन दबे कुचले लोगों के लिए, जो पीढ़ियों से दबाये जा रहे हैं. जिनका शोषण समाज की मुख्यधारा में आज भी एक सामान्य चीज़ है. वो उनके लिए खड़े होता है, जिनके साथ अन्याय होता है. वो अपनी एमफिल में आदिवासियों के शोषण को अपनी रिसर्च का विषय बनाता है. जब यूनिवर्सिटी प्रशासन उसकी थीसिस को सबमिट होने में अड़ंगे डालता है, तो उमर कोर्ट से अपने हक के लिए लड़ता है. उन्हें दिक्कत उम्र के इस जुझारूपन से है.

उन्हें समस्या यहाँ है, कि उनकी तोड़ने वाली विचारधारा के खिलाफ़ उम्र मुखर है, वो बर्दाश्त नहीं करते कि कोई उनकी खोखली विचारधारा की धज्जियां उधेड़े. वो चाहते हैं कि देश में हर चीज़ हिटलरशाही कि तरह चले. वो चाहते हैं, कि ऐसे युवा जो भगत सिंह और डॉ आंबेडकर को भारतीय राजनीति में अपना आदर्श मानते हैं. वो सावरकर और गोडसे के वंशजों के आगे झुक जाएँ. अब आप ही बताईये, कि क्या उमर पर किये गए हमले के अन्दर इनकी कुंठित मानसिकता नज़र नहीं आती?

सुनिए ये बिलकुल नहीं चाहेंगे कि आप रोज़गार से लेकर महंगाई तक, आम आदमी की खाली होती जेब से लेकर फांसी लगाते किसान तक. छात्र से लेकर रेप और अन्य अत्याचार की शिकार होती महिलाओं की आवाज़ उठायें. क्योंकि जब आप आवाज़ उठाएंगे तो कुंठित मानसिकता के प्राणी अपनी सारी एनर्जी आपको नक्सल घोषित करने में लग जायेंगे. फिर उस समस्या में हिन्दू मुस्लिम एंगल देने की कोशिश करेंगे. जब सारे तरीके फेल होते नज़र आयेंगे और संवाद करने की स्थिति में नहीं होंगे तो अंत में ये यही कायराना हरकत करने में उतारू हो जाते हैं. खैर अपनी आवाज़ को बुलंद रखिये क्योंकि अब खौफ से आज़ादी का वक़्त करीब है. ये जो खौफ देश में पैदा किया जा रहा है, इस खौफ से देश जल्द ही आज़ाद होगा.

जय हिन्द , जय भारत की एकता