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कर्णाटक में ट्रांसजेंडर्स को नौकरियों में मिलेगा 1 फ़ीसदी आरक्षण

कर्णाटक में ट्रांसजेंडर्स को नौकरियों में मिलेगा 1 फ़ीसदी आरक्षण

समाज मे लंबे समय से समानता और बराबरी की लड़ाई लड़ रहे ट्रांसजेंडर्स को मुख्य धारा में लाने और उनके विकास के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। कर्नाटक सरकार ने ट्रांसजेंडर्स को सरकारी नौकरियों में अब एक फीसदी आरक्षण देने का सराहनीय कदम उठाया है। ट्रांसजेंडर को ये आरक्षण हर कैटेगरी में दिया जाएगा। जिसके लिए कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक सिविल सर्विसेज रूल्स 1977 में ज़रूरी बदलाव भी करवाए हैं।इसके तहत सरकारी नौकरियों के आवेदन फॉर्म में अब लिंग वाले कॉलम में मेल,फीमेल के अलावा अदर(other) का ऑप्शन भी दिया जाएगा। ये ऑप्शन सभी ग्रुप रिक्रूटमेंट पर लागू होंगे साथ ही किसी भी ट्रांसजेंडर के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकेगा।

आज तक हम इन्हें किन्नर,थर्ड जेंडर, सेक्स वर्कर्स और बधाई मांगने वालों के तौर पर देखते आएं है लेकिन अब ये समुदाय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहा है और लगातार उसके लिए आवाज़ भी उठा रहा है। इसी का फ़ल है कि अब ये समुदाय शिक्षा,स्वास्थ, साशन,और कामकाजी जैसे क्षेत्रों में एक आम ज़िंदगी जी रहा है।

संगमा संगठन ने डाली थी कोर्ट में याचिका,जिसके जवाब में सरकार ने कोर्ट को दिया ये जवाब

दरअसल, कर्नाटक में कॉन्स्टेबल फोर्स की 2,420 और बैंड्समेन की 252 सीटों की भर्ती के लिए निकली गयी नोटिफिकेशन के बाद संगमा संगठन ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका डाली थी। जिसमे कहा गया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग से कैटेगरी बनाई जाए और नियुक्ति में इस समुदाय के लिए रिज़र्वेशन की योजना भी बनाई जाए। जिसके जवाब में कर्नाटक सरकार ने कोर्ट से सरकारी नौकरी में एक फीसदी आरक्षण और आवेदन पत्र में अन्य के ऑप्शन की बात कही है।

संगमा संगठन क्या है और ये किसके लिए काम करता है

संगमा संगठन LGBTQ समुदाय का संगठन है जो थर्ड जेंडर और सैक्स वर्कर्स के लिए काम करता है। इसके अलावा ये संगठन HIV संक्रमित लोगो के लिए भी काम करता है। कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए इस संगठन ने नालसा बनाम भारत सरकार के मामले के फैसले का हवाला दिया है। याचिका में कहा गया की सुप्रीम कोर्ट थर्ड जेंडर के अधिकारों को पहले ही पहचान दे चुका है।

अलग अलग क्षेत्रों में ट्रांसजेंडर्स अपनी पहचान बना रहे हैं

फैशन,शिक्षा,व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में थर्ड जेंडर अपनी पहचान बना रहा है। 2018 में छत्तीसगढ़ की वीणा ने मुंबई में आयोजित नेशनल लेवल बीयूटी कांटेस्ट में ट्रांस्क्वीन का ख़िताब जीता और भारत की पहली मिस ट्रांस क्वीन बनी। पिछले साल नोयडा के सेक्टर 119 में उरूज नाम की ट्रांसजेंडर ने अपना खुद का कैफ़े खोला और इस कैफ़े में काम करने वाले सभी ट्रांसजेंडर ही है। वहीं छत्तीसगढ़ में इसी साल मार्च में 13 ट्रांसजेंडर्स को कॉन्स्टेबल पद पर भर्ती किया गया है। पिछले साल नोयडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भी सराहनीय कदम उठाया। नोयडा सेक्टर 50 के सभी मेट्रो स्टेशन को ट्रांसजेंडर समुदाय संचालित करेगा ये फैसला लिया गया।

राजनीति में भी दिख रही है भागीदारी

अपने समुदाय को अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ साथ अब राजनीति में भी इनकी भागीदारी दिख रही है। 2019 के लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने प्रयागराज से किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी मां को उम्मीदवार बनाया था। इसके अलावा मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावो में एक साथ 6 किन्नरों ने चुनाव लड़ा था।वहीं साल 2000 में शबनम मौसी के रूप में पहली किन्नर विधायक भी मध्यप्रदेश से ही मिलीं थी।
हमेशा से हीन भावना से देखे जाने वाले और प्रताड़ित होने वाले इस ट्रांसजेंडर समुदाय के विकास के लिए उठाया जाने वाला हर कदम सराहनीय ही माना जाएगा बशर्ते इनका लाभ इस समुदाय को जमीनी स्तर तक मिले।

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Sushma Tomar