December 2, 2021
इतिहास के पन्नो से

भारत का बंटवारा करने वाला शख्स जिसकी “आयरलैंड” के मिलिटेंट्स ने हत्या कर दी थी

भारत का बंटवारा करने वाला शख्स जिसकी “आयरलैंड” के मिलिटेंट्स ने हत्या कर दी थी

भारत के इतिहास में 1940 का दशक ऐतिहासिक रहा है क्योंकि इसी दौर में देश को एक ऐसा दंश झेलना पड़ा था जिसकी कड़वी यादें आज भी ताज़ा हैं,विभाजन यूँ तो आज भी एक किस्से की तरह सुनाया जाता है, लेकिन इस किस्से के कई केरेक्टर भी थे,इन्हीं में से एक थे लार्ड लुई माउंटबेटन, जिन्हें भारत का अंतिम वायसरॉय बनाया गया था।

आज ही के दिन यानी 25 जून को 1900 को जन्मे माउंटबेटन (Lord lui mountbenton) भारत के इतिहास मे गिने जाने वाले उन “विदेशियों” में से एक हैं जिन्हें भारत के इतिहास में अलग तरह से याद किया जाता है,आज इन पर ही चर्चा करते हैं।

विभाजन का ऐलान करने वाले “वायसरॉय”

1947 में हुई आज़ादी के साथ देश का विभाजन भी एक ऐतिहासिक कदम था, लेकिन सभी विवादों और सवालों से परे एक सवाल ये भी है कि “विभाजन” होगा इसकी घोषणा किसने की थी?

1945 के दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से ही ये अटकलें लग रही थी अब देश जल्दी ही आज़ाद होगा और ऐसा हुआ भी लेकिन मार्च में 1947 में “वायसरॉय” बन कर लार्ड माउंटबेटन बन कर आये थे, जब इन्हें वायसरॉय बनाया गया था उस वक़्त देश की स्थिति बहुत खराब थी बंगाल में भयंकर दंगे फैले हुए थे और इसी दौरान इन्होनें ये कार्यभार संभाला था।

अपने कार्यकाल में कुछ महीनों तक चर्चा के बाद “लार्ड लुई माउंटबेटन” ही वो शख्स थे जिन्होंने ये घोषणा की थी कि “देश आजाद तो होगा मगर एक नहीं रहेगा” और ये सब उन्होंने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बड़े बड़े नेताओं से लम्बी मीटिंग के बाद कहा था।

“माउंटबेटन” योजना जिसने ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान बना दिया।

3 जून 1947 को माउंटबेटन योजना ही के तहत देश का विभाजन स्वीकार किया गया था जिसके मुताबिक बंगाल और पंजाब क्षेत्र के हिस्से को “पाकिस्तान” बनाया जाना था और इसमें कौनसा क्षेत्र कहाँ पर जाएगा यानी सदियों से एक साथ बसे हुए शहर शायद अब दो देशों में बंट जाने थे।

इस स्थिति को कबूल करने को लेकर अक्सर भारतीय नेताओं को लेकर भी सवाल किया जाते रहे हैं की उन्होंने “विभाजन” को मंज़ूरी क्यों दी थी? इसका जवाब मशहूर इतिहासकार “विपिन चन्द्र” अपनी किताब “आधुनिक भारत इतिहास में लिखते हैं।

विपिन चन्द्र कहते हैं कि “देश भर में बड़े पैमाने पर खून खराबा और साम्प्रदायिक दंगों का अंदेशा सामने था,इसलिए राष्ट्रवादी नेताओं ने मजबूर होकर भारत का विभाजन स्वीकार कर लिया,लेकिन उन्होंने दो राष्ट्रों के सिद्धांत नहीं माना”

जिन्ना ने चला लार्ड माउंटबेटन के साथ दांव

दरअसल जब देश दो देश अलग अलग हो गए थे और पाकिस्तान वजूद में आ गया था तो भारत ने लार्ड माउंटबेटन को अपना पहला गवर्नर जर्नल बनाना कबूल किया,क्यूंकी अभी पाकिस्तान से बड़ी तादाद में शरणार्थी भारत आ रहे थे,इसलिए नेहरु जी इस नाज़ुक वक़्त में माउंटबेटन ही को ये ज़िम्मेदारी सौंपी थी।

हालांकि ऐसा लग रहा था कि जिन्ना भी हालात सुधरने तक ये पद उन्हें देंगे लेकिन आखिर वक़्त में उन्होंने खुद ये पद ग्रहण करते हुए सबको चौंका दिया था,हालांकि माउंटबेटन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी थी।

बंटवारे के 32 साल बाद आयरिश मिलिटेंट्स ने की हत्या

ये हत्या IRA यानी आयरिश रिपब्लिकन आर्मी ने की थी ये एक मिलिटेंट ऑर्गनाइज़ेशन है,जिसे ब्रिटेन आतंकवादी कहता रहा है, इस संगठन का इतिहास जुड़ा है आयरलैंड से, जो ब्रिटेन के पश्चिम में बसा एक द्वीपनुमा हिस्सा है, इसके दो हिस्से हैं एक, रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड. दूसरा,नॉदर्न आयरलैंड. रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड आज़ाद देश है,जबकि नॉदर्न आयरलैंड यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा है।

ब्रिटेन ने उनकी हत्या के इल्ज़ाम में दो लोगों को अरेस्ट किया था,इनके नाम थे- थॉमस मैकमहोन और फ्रैंसिस मैकगर्ल मैकमहोन ने 19 साल जेल की सज़ा काटी, जबकि फ्रैंसिस को सबूतों की कमी के कारण रिहा कर दिया गया था।

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Asad Shaikh