बॉलीवुड

बॉलीवुड को शेक्सपियर की याद दिलाने वाला डायरेक्टर

बॉलीवुड को शेक्सपियर की याद दिलाने वाला डायरेक्टर

अगर मैं आपसे एक फ़िल्म का नाम लेना चाहता हूं ,आप तुरंत उसे पहचान जाएंगे,फ़िल्म का नाम हैदर है। शाहिद कपूर की फ़िल्म जिसमें इरफान खान भी हैं,आपको ध्यान आ गया होगा अब मैं आपसे कहूँ कि ये फ़िल्म एक “प्ले” पर बनी है,उसका नाम हैमलेट है। इसके राईटर का नाम है विलियम शेक्सपियर, आपको थोड़ी सी हैरानी हो रही होगी।

लेकिन इस लिस्ट में और बहुत सारी फिल्में हैं जिन्हें विदेशी प्ले पर बनाया गया है,जिसमें “ओमकारा”, “मक़बूल” और “7 खून माफ” शामिल हैं। ये सभी फिल्में विदेशी प्ले पर बनी हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि ये फिल्में बनाई किसने हैं? तो मैं बता दूं कि इन फिल्मों को बनाने वाले शख्स एक ही हैं,विशाल भारद्वाज,जिन्होंने बॉलीवुड में सिर्फ अपनी क्षमता के बल पर एक अलग जगह बनाई है। आज उन्हीं का बर्थडे है,आइये उनके बारे में जानते हैं।

बिजनोर में जन्में और मुंबई जा पहुंचें

बॉलीवुड में डायरेक्टर और म्यूजिशियन के तौर ओर स्थापित विशाल भारद्वाज का जन्म पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गंगा किनारे वाले एक छोटे से शहर बिजनोर में 4 अगस्त 1965 को हुआ था। बचपन बिजनोर में गुज़ारने के बाद वो मेरठ चले गए थे और उसके बाद वहां क्रिकेट की फील्ड में उन्होंने अपना हुनर आजमाया था।

केवल 17 साल की उम्र में विशाल ने अपना काबिलियत का लोहा मनवा दिया था उन्होंने एक गाने का संगीत दिया था। जिसे सुनने के बाद विशाल के पिता ने इस बारे में संगीतकार ऊषा खन्ना से बात की। ऊषा खन्ना ने उस संगीत को फिल्म ‘यार कसम’ (1985) में लिया।

अपना काम खत्म करने के बाद विशाल वापस दिल्ली आ गए और ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। विशाल ने अपनी पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से की है। गौर करने की बात ये है कि विशाल के पिता ने भी संगीत के क्षेत्र में काम किया है।

मुंबई में अपनी अलग पहचान

साल 1998 में रिलीज हुई शानदार फ़िल्म ‘सत्या’ और 1999 में गुलजार की फिल्म ‘हू तू तू’ जैसी क्लासिकल फिल्मों में संगीत विशाल भारद्वाज ने दिया था। 1999 में आयी फिल्म ‘गॉडमदर’ के लिए उन्हें बेस्ट संगीतकार का नेशनल अवॉर्ड दिया गया।

लेकिन अभी उन्हें फ़िल्म बनाने में भी अपनी पहचान स्थापित करनी थी,और उनका सुनहरा करियर अभी उनके इंतज़ार में था। उन्हें यूँ तो ओमकारा’ और ‘हैदर’ के लिए भी नेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं। निर्देशक के तौर पर विशाल की मुख्य फिल्में ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’, ‘कमीने’, ‘7 खून माफ’, ‘डेढ़ इश्किया’ जैसी फिल्में हैं।

मैं यहां विशाल भारद्वाज द्वारा लिखी गयी और डायरेक्ट की गई अपनी पसंद की फिल्मों के बारे में लिख रहा हूँ। ये फिल्में मुझे पर्सनली बहुत पसंद हैं। अगर आप शानदार फिल्मों के शौकीन हैं तो ये फिल्में ज़रूर देखियेगा।

1- मक़बूल- 2004 में आई एक क्लासिकल फ़िल्म है जो बॉलीवुड की चकाचौंध मे अलग चमकती है। इस फ़िल्म में पंकज कपूर ने “जहाँगीर खान” उर्फ अब्बा जी का रॉल किया है उनका किरदार शानदार है। इसके अलावा इस फ़िल्म में मशहूर अभिनेता इरफान खान लीड रॉल में हैं।

वहीं पीयूष मिश्रा और तब्बू ने भी इसमें अहम किरदार निभाये हैं। वहीं ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह ने पुलिस वालों का किरदार निभाया है। मुम्बई के अंडरवर्ल्ड पर बनी ये फ़िल्म विशाल भारद्वाज के करियर के लिए मील का पत्थर है।

2- ओमकारा- शेक्सपियर के “ओथेलो” प्ले पर बनी ये फ़िल्म अजय देवगन ,सैफ अली खान और विवेक ओबेरॉय के शानदार अभिनय के लिए याद रखी जायेगी। करीना और अजय देवगन की केमिस्ट्री इस फ़िल्म में शानदार है।

3- हैदर- साल 2014 में कश्मीर को ध्यान में रखते हुए बनाई गई इस फ़िल्म को दो वजहों के लिए याद रखा जाएगा। पहली कश्मीर की तत्कालीन स्थिति और उसके इतिहास का एक ऐसा आईना जो बहुतों से छुपा था उसे फ़िल्म में उतारा गया।

दूसरा शाहिद कपूर का अपने करियर का सबसे बेहतरीन काम,जो शाहिद के लिए उनके चाहने वालों के लिये एक ऐसा मुक़ान है जो उन्हें बॉलीवुड में हमेशा याद रखने के लिए काफी है। इसका श्रेय भी विशाल भारद्वाज ही को जाता है।

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Asad Shaikh