रविश कुमार का लेख शाहीन बाग़ की रोज़ा पार्क्स के नाम

रविश कुमार का लेख शाहीन बाग़ की रोज़ा पार्क्स के नाम

1 दिसंबर 1953 को रोज़ा ने बस की सीट से उठने से इंकार कर दिया। कंडक्टर चाहता था कि अश्वेत रोज़ा गोरों के लिए सीट छोड़ दे। उस समय अमरीका के अलाबामा में ऐसा ही सिस्टम था। चलने के रास्ते से लेकर पानी का नल और बस की सीट गोरे और अश्वेत लोगों में बैठी […]

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 वायु सेना, सरकार के पराक्रम के बीच पत्रकारिता का पतन झाँक रहा है – रविश कुमार

वायु सेना, सरकार के पराक्रम के बीच पत्रकारिता का पतन झाँक रहा है – रविश कुमार

आज का दिन उस शब्द का है, जो भारतीय वायु सने के पाकिस्तान में घुसकर बम गिराने के बाद अस्तित्व में आया है। भारत के विदेश सचिव ने इसे अ-सैन्य कार्रवाई कहा है। अंग्रेज़ी में non-military कहा गया है। इस शब्द में कूटनीतिक कलाकारी है। बसों से लैस लड़ाकू विमान पाकिस्तान की सीमा में घुस […]

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 मर्दों के अंदर धर्मांन्धता, जातीयता, मर्दानगी का अहंकार भरा है

मर्दों के अंदर धर्मांन्धता, जातीयता, मर्दानगी का अहंकार भरा है

बलात्कार के मामले को इस सरकार बनाम उस सरकार का मुद्दा बना कर देख लिया गया। कठुआ बनाम उन्नाव का मुद्दा बनाकर देख लिया गया। हिन्दू बनाम मुसलमान बनाकर देख लिया गया। अपराधियों के मज़हब देखे गए। पीड़िता का जात धर्म देख लिया गया। राजनीति का कोई ऐसा गर्त न रहा होगा जहाँ बलात्कार का […]

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 आप कौन सा भारत चाहते हैं, बुज़दिल या बहादुर ?

आप कौन सा भारत चाहते हैं, बुज़दिल या बहादुर ?

तीन चार दिन पहले की बात है। एक बैंक का सीनियर अफसर बाज़ार से चूड़ियां ख़रीद लाया अपने नीचे के अफसर को पहनाने के लिए। जुर्म क्या था? अटल पेंशन योजना बेचने का जो दैनिक टारगेट दिया गया था, उसे पूरा नहीं कर पाया था। पूरे बैंक में खड़े उस बैंक कर्मचारी की हालत सोचिए। […]

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