पहले भूख से बच्ची की जान गयी, अब गाँव वालों और दबंगों ने धमकाया

पहले भूख से बच्ची की जान गयी, अब गाँव वालों और दबंगों ने धमकाया

देश की आर्थिक स्थिति की ख़बर हो या भूख मिटाने संबंधित ख़बर, हर क्षेत्र में भारत पिछड़ता ही जा रहा है. क्या आपने कभी गौर किया क्यों? नहीं किया होगा, हाँ हम ये ज़रूर गौर कर लेते हैं, कि किस ख़बर के सामने आने से और पीड़ितों के सामने आने से देश, राज्य, शहर या […]

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 एक बांगला कविता जिसका हिंदी अर्थ है – "भात दे हरामज़ादे"

एक बांगला कविता जिसका हिंदी अर्थ है – "भात दे हरामज़ादे"

बांग्लादेश के कवि रफीक़ आज़ाद की एक कविता का शीर्षक है ‘भात दे हरामज़ादे’. रफीक़ की मूल बांग्ला कविता का हिंदी अनुवाद 1990 में ज्ञानरंजन की पत्रिका ‘पहल’ के 39वें अंक में प्रकाशित हुआ था. ‘पहल’ के उस खास अंक में पैंतालीस बाँग्लादेशीय कवियों की 103 कविताओं के साथ वहाँ के साहित्यकार बदरुद्दीन उमर के […]

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