विटामिन डी धूप से मिलता है,और विटामिन सी किसी और चीज़ से लेकिन एक और विटामिन है जो हमे खुद ही ढूंढना पड़ता है हासिल करना पड़ता है और इसे हम विटामीन “पी” कहतें है,चोंक गयें न आप,ये विटामीन “पी” क्या है अरे साहब ये है विटामीन “पॉलिटिक्स” जो किसी को दें या न दें राजनीतिक दलों को तो भरपूर एनर्जी देता है। जब इसी बात को गहराई से आपको जानना हो तो आप ज़रा सा ध्यान संसद सत्र की तरफ़ कर लिया करें मालूम चल जायगा।
राजनीति का ये विटामिन जो होता है न ये बहुत मौकापरस्त होता है यही वजह है कि जब एफडीआई और जीएसटी कांग्रेस अपने शासन में ला रहीं थी तो मुख्य विपक्षी दल भाजपा अपने एक पैर पर खड़ी हो गयी और उसने बिल पारित नही होने दिया। लेकिन जैसे ही बारी अपने सरकार में आने की आयी तो तुरंत बिल पेश भी किया और पास भी कराया। इससे जो है “एनर्जी” मिली ओर सिर्फ भाजपा को ही नही कांग्रेस को भी बहुत मिली।
अब इस बात को मुद्दे पर लातें है,संसद के पटल पर सत्ताधारी भाजपा ने “तत्काल ट्रिपल तलाक” का बिल क्या लाया जैसे खुशियों की लहरें दौड़ गई तमाम जगह मिठाई बंटी और जैसे सारी समस्याएं छूमंतर होकर रह गई। यही दुआ रही कि बिल लोकसभा में बड़ी आसानी से पारित भी हो गया,अगर असदुद्दीन ओवैसी के द्वारा गुजरात मे “भाभी” को याद करना हटा दें तो।
लेकिन कांग्रेस पुरानी खिलाड़ी है उसने राज्यसभा के इंतेज़ार किया,और जैसे ही ये बिल राज्यसभा में आया कांग्रेस ने धड़ाधड़ मुद्दे उठाने शुरू कर दिये,की ये कमी है और वो कमी है और इसी वजह से दो दिन राज्यसभा स्थगित होने के बाद अंत मे बिल जो है राज्यसभा में पारित होने से रह गया। अब इस बिल में होने वाले खर्च,वक़्त और सियासी माहौल को अलग भी कर दें तो जनता का नुकसान ही हुआ।
आम जनता जो पेट्रोल के बढ़े हुए दामों से परेशान है,जो बेरोजगारी से परेशान है जो सड़कों में होते गड्ढों से परेशान है और तो और इस वजह से भी परेशान है कि “विकास” क्यों नही हो रहा है उसको सरकार और विपक्ष “तत्काल ट्रिपल तलाक” दे रहा है और वो भी राजनीतिक शहद में डुबो कर मगर किसी को पता ही नही चला।
चालिये “जनता सब जानती है” से ही काम चलाया जाए और इस बात को अंतमे लाएं तो कुछ प्रतिशत महीलाएं और हां पीड़ित महिलाएं जिनके साथ समस्या है,उनके मामले को इतना तूल क्यों? तलवार से नाखून काटने की कोशिश क्यों? जवाब के इंतज़ार में आप मैं और “महिला आरक्षण बिल” जिस पर बात नही हुई बाकी बिल लटक गया अगले सत्र तक है न…

 असद शेख