ग्वालियर में मौका था कांग्रेस के सदस्यों को भाजपा में शामिल करने का मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यक्रम का। ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने जबसे भाजपा का दामन थम है, उसके बाद ये पहला मौका था जब वो ग्वालियर आए थे। वही ग्वालियर जो कभी सिंधिया राजघराने की राजनीति का केंद्र हुआ करता था। भाजपा नेता सिंधिया का दावा था कि ग्वालियर चम्बल क्षेत्र के 5000 कांग्रेसी कार्यकर्ता आज भाजपा का दामन थामने वाले हैं। भाजपा के इस दावे के साथ ये भी कहा जा रहा था, कि इस कार्यक्रम में इस क्षेत्र के बचे हुए कांग्रेसी भी आज भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जब सिंधिया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो रास्ते में सिंधिया ने जो देखा, उसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। उन्होंने सपने में सोचा भी नहीं होगा कि ग्वालियर के अंदर सिंधिया फ़ैमिली का ऐसा विरोध हो सकता है। जिस ग्वालियर में कभी सिंधिया राजघराने का सिक्का चला करता था, आज उसी ग्वालियर में कांग्रेस ने ऐसी भीड़ इकट्ठा की, जिसकी कल्पना कभी भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नहीं की होगी। प्रदर्शन की तस्वीरें मध्यप्रदेश कांग्रेस के ट्वीटर हैंडल व कांग्रेसी नेताओं के ट्वीटर हैंडल से शेयर की गई हैं।

https://twitter.com/INCMP/status/1297098756228182016

 

दरअसल ग्वालियर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ा प्रदर्शन किया, सिंधिया के लिए जिन नारों का उपयोग किया उन नारों का ग्वालियर की भूमि में लगाया जाना बड़ा मैसेज देता है। भाजपा का दावा था कि ग्वालियर क्षेत्र में कांग्रेस अब खत्म हो चुकी है। ऐसे में लगभग 2000 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इकट्ठा होकर सिंधिया के लिए गद्दार जैसे शब्दों का उपयोग करते हुए जबरदस्त विरोध किया। वीडियो में नारों को साफ़-साफ़ सुना जा सकता है, बहुत से कांग्रेस समर्थकों और सोशलमीडिया यूज़र्स ने इस प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियोज़ को पोस्ट किया। ग्वालियर प्रशासन को छोटे मोठे विरोध प्रदर्शन का अंदेशा था, इसलिए एक रात पहले ही कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया था। ताकि वो विरोध न दर्ज करा पाएं। इसके बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने अपने ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर जानकारी दी थी।

इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता गदगद नज़र आए, मध्यप्रदेश में सिंधिया की बगवात के बाद सरकार गिरने के बाद काँग्रेसियों के मन में एक उम्मीद की किरण जागी है। अब देखना ये है, कि क्या उपचुनाव में कांग्रेस अपना खोया हुआ क्षेत्र फिर से हासिल कर पाएगी ? क्या कांग्रेस दोबारा मध्यप्रदेश की सत्ता हासिल कर पाएगी ? अब यह तो सबैट हो गया है, कि मध्यप्रदेश में उपचुनाव की राह भाजपा के लिए आसान नहीं है। खास तौर से ग्वालियर चम्बल क्षेत्र उतना आसान नहीं है, जितना सिंधिया के भाजपा में आने से भाजपा उस क्षेत्र को आसान समझ रही थी।