विचार स्तम्भ

नज़रिया – सत्ता व अपराध के गठजोड़ से निकलती रेप के आरोपी की ये बेशर्म हंसी

नज़रिया – सत्ता व अपराध के गठजोड़ से निकलती रेप के आरोपी की ये बेशर्म हंसी

यह है मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर। मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। मैंने बलात्कार के तमाम मामले कवर किए हैं। सामान्यतया बलात्कार का आरोपी मुंह छिपाए जमीन पर नीचे बैठा रहता है। मजाल क्या कि हंस दे। अगर गलती से चेहरा ऊपर कर दे तो उसे कोई सिपाही 4-5 पड़ाका लगा देता है। वहां मौजूद लोग गालियों की बौछार कर देते हैं कि इसे शर्म नही आ रही है अभी भी।
इतना ही नहीं। जेल में बलात्कार के आरोपी को सबसे ज्यादा घृणा की दृष्टि से देखा जाता है। वहां भी उसे गालियां पड़ती हैं। कुछ बोले तो दो चार पड़ाका लग जाता है। रात में उसे कत्ल के आरोपी कैदी का पैर दबाना होता है। उससे टॉयलेट और नालियां साफ कराया जाता है। उसका यौन शोषण भी हो जाता है।
लेकिन अगर बलात्कार का आरोपी ब्रजेश ठाकुर जैसा आदमी हो,जिसे सरकार से हर महीने लाखों रुपये मिल रहे हों, वह मुख्यमंत्री की तारीफ के लिए अखबार कहा जाने वाला मुखपत्र निकाल रहा हो तो उसका बेखौफ होना लाज़िम है।
सरकारी बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ लगातार बलात्कार होने की पुष्टि हुई है, जिनकी उम्र 7 से 16 साल है। इनमें से तमाम लड़कियों को मेले में अपने परिजनों से बिछड़ने पर यहां रखा गया था। उनके द्वारा परिजनों का पता बताए जाने पर भी उन्हें घर नहीं पहुँचाया गया। बच्चियां ब्रजेश ठाकुर को हंटर वाला अंकल कहती थीं क्योंकि जो लड़की विरोध करती थी उसे ब्रजेश हंटर से पीटता था।
लड़कियां जहां रहती थीं वहां बेहोश करने वाली दवा के अलावा वो गुप्त रास्ता भी मिला। बालिका गृह के कमरे से एक गुप्त सीढी सीधे ब्रजेश ठाकुर के प्रेस में खुलती थी। वहीं से लड़कियों को ब्रजेश जबरी अपने ग्राहकों के पास भेजता था।
अभी इस मामले में किसी मधु नाम की महिला का नाम आ रहा है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया। कहा जा रहा है कि यह ब्रजेश की मुख्य सहयोगी थी।
सत्ता और अपराध के गठजोड़ का यह एक ऐसा मामला है जिसके सामने नैतिकता, पुलिस, आम लोगों का गुस्सा सबकुछ बेकार है। यह एक केस स्टडी है जिसे समाजशास्त्र, अपराध विज्ञान, राजनीति विज्ञान में पढ़ाया जाता रहेगा। इस पर शोध होते रहेंगे। सौ साल बाद याद किया जाएगा कि ऐसा घृणित काम भारत की धरती पर होता था। यह हंसी भी लोगों को याद रहेगी। हां, नीतीश कुमार रहें या मर जाएं। यह कांड जिंदा रहेगा।

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Satyendra PS

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