देश में जहाँ एक तरफ राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटा जा रहा है तो दूसरी तरफ़ सेक्युलरवाद का, मेरी समझ में लगता है सर्टिफिकेट बांटने वालों ने आपस में गुप्त समझौता कर लिया है की राष्ट्रवाद का मतलब पूर्ण हिंदुत्व, और सेक्युलरवाद का मतलब मिक्स्ड हिंदुत्व है। आप यदि पूर्ण हिंदुत्व के समर्थक हैं तो आप राष्ट्रवादी हैं और यदि आप मिक्स्ड हिंदुत्व के समर्थक हैं तो आप सेक्युलरवादी। मिक्सड हिंदुत्व का एक उदाहरण यह है की जिस बाबरी मस्जिद को शहीद करने वाले रथ यात्रा के कमांडर आडवाणी को बीच रास्ते मे रोक कर नजरबंद करने वाले लालू यादव ने देशभर में अपनी विचारधारा को मज़बूती से एन्टी कम्युनल साबित किया था ठीक उन्ही की जीवन में उनके बड़े बेटे बिहार सरकार में पूर्व स्वास्थ मंत्री ने मिक्स्ड हिंदुत्व की विचारधारा को अपनाते हुए बयान दिया की “हम राममंदिर बनाने का काम करेंगे” हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, अति पिछड़ा, गरीब, दलित सब वहां जाएगा और एक-एक ईंट रखेगा। मतलब मिक्स्ड हिंदुत्व को मजबूत करेगा।

मिक्स्ड हिंदुत्व का दूसरा उदाहरण: शरद यादव किसी नाम का मोहताज नही है, सुना हुँ इस बार राजद के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, जी हाँ राजद के टिकट पर। शरद यादव की अपनी पार्टी है “लोकतांत्रिक जनता दल” लेकिन यह आदरणीय लालू प्रसाद जी की पार्टी “राजद” की टिकट पर ही चुनाव लड़ेंगे, चुनाव बाद अपनी पार्टी का विलय राजद में कर देंगे। एन डी ए के पूर्व संयोजक शरद यादव जी विलय के बाद शत प्रतिशत सेक्युलर हो जायेंगे, बीजेपी के पोषक, गुजरात नरसंहार के शोषक अब कम्युनल नही रहेंगे, गुजरात दंगों के समय अटल सरकार में मुसलमानों के नरसंहार पर बड़ी खामोशी से चुप्पी साधते हुए मोदी का साथ देने वाला अब मुसलमानों के समर्थक आदरणीय लालू जी की पार्टी से संसद पहुँचने की तैयारी में लग गये हैं। राजद के किसी मुसलमान नेता में यह हिम्मत नही हुई की शरद यादव से गुजरात में मुसलमानों के नरसंहार पर केंद्रीय मंत्री रहते हुए चुप्पी साधने का कारण पूछ सके, राजद द्वारा उनके टिकट पर आपत्ति जता सके। शरद यादव का बॉयकॉट कर सके।

मिक्स्ड हिंदुत्व का तीसरा उदाहरण: शत्रुघ्न सिन्हा अब पटना साहिब से काँग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, बीजेपी हमारी पार्टी कहने वाले, बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिये माहौल बनाने वाले, आडवाणी के साथ साथ रथ यात्रा में नारे लगाने वाले अब मुसलमानों का भी प्रतिनिधित्व करेंगे।

लालू जी ने नीतीश कुमार को भी अपनाया था, मुसलमानों को नीतीश कुमार के सेक्युलर होने का सर्टिफिकेट भी बांटा था, अपने बेटे को उपमुख्यमंत्री बनाने के लिये बीजेपी के पुराने सहयोगी से भी हाँथ मिलाया था, राजनीति में अपने दोनों बेटे को स्थापित करने के लिये मिक्स्ड हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत किया था, मिक्स्ड हिंदुत्व के एजेंडे को इसलिये की नीतीश कुमार और शरद यादव ने हिंदुत्व के एजेंडे को 17 साल तक पूरी तरह समर्थन दिया है। हिंदुत्व के एजेंडे को ढोया है। लालूजी जैसे नेता धोखा नही खा सकते हैं ।

सेक्यूलरवादी पार्टियो ने सवाल पूछने के डर से दिल व दिमाग में यह बैठा दिया है की “बीजेपी को हराना हमारी प्राथमिकता है” जिन लोगों ने बीजेपी और हिंदुत्व के एजेंडे को भरपूर शक्ति प्रदान की है उसे ही अपनी पार्टी से चुनाव लड़ाने वाले जब बोलते हैं की बीजेपी को हराना हमारी प्राथमिकता है तो ज्यादा शक होता है। आइये एक नजर इधर भी:

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी ने अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री रहते हुए बीजेपी को बंगाल में स्थापित किया और अब बीजेपी को हराना उनकी प्राथमिकता है।

झारखंड में जे एम एम के सुप्रीमो शिबू सोरेन और जे वी एम के सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की भी प्राथमिकता बीजेपी को हराने की है जबकी यह दोनों नेता बीजेपी के घोर समर्थक रहे हैं, बाबूलाल मरांडी तो शाखा में ही अपना आधा से अधिक जीवन देकर बीजेपी की ओर से झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बनें।’ बिहार से शत्रुघ्न सिन्हा, शरद यादव का भी बीजेपी को हराना प्राथमिकता है।

सच तो यह है की मिक्स्ड हिंदुत्व के समर्थक यह सभी बड़े चेहरे बीजेपी हराने के नाम पर एक नैरेटिव तैयार किया है की मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सवाल करने में एक डर पैदा हो, डर अधिकार और हक़ मांगने से वंचित करता है, हक़ व अधिकार से वंचित समाज मुख्यधारा में कभी नही जुड़ सकता।

सवाल पूछने और आपत्ति जताने के लिये अपनी जमीन मज़बूत होनी चाहिये। जमीन ऐसी मज़बूत की धक्के मार कर निकालने पर भी आपको भविष्य की चिंता न हो। शरद यादव को बहुजन आंदोलन के नायक ने भी अपनाया था, बहुजन मुक्ति पार्टी को शरद यादव की पार्टी में विलय कर दिया था लेकिन उस समय मैं शरद यादव के विरुद्ध, नेतृत्व के इस फैसले के विरुद्ध मुखर रहा, नेतृत्व के फैसले को इनकार करना मुझे महंगा पड़ा । मुखर रहिये वरना आपका प्रतिनिधित्व, आपका नेतृत्व सिर्फ डर के नाम पर खत्म कर दिया जायेगा, बीजेपी को हराने की प्राथमिकता वाले आपका हक़ व अधिकार छीन लेंगे। सजग रहिये, जागरूक रहिये, आवाज बुलंद करते रहिये चूंकि आज भी आपके और हमारे लब आजाद हैं।