आपको याद होगा कुछ दिनों पहले हम एक प्रस्तुति लेकर आये थे और हमने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक जादूगर हैं, और हर जादूगर की तरह उन्हें हिप्नोसिस आता है. यानि कि सम्मोहन. और वो देश की जनता के बहुत बड़े हिस्से का सम्मोहन कर रहे हैं. और क्या आप जानते हैं कि इस जादूगर के कुछ नारे भी हैं. वो नारे याद हैं न आपको. ताज़ा नारा तो मैं भी चौकीदार हूँ. इससे बस कुछ ही दिनों पूर्व नारा आया था कौनसा वाला “ नामुमकिन अब मुमकिन है” और “मोदी है तो मुमकिन है”. फिर कुछ दिनों पहले आपको याद होगा नारा था “सबका साथ, सबका विकास”. और जो सदाबहार नारा था “ अच्छे दिन आने वाले हैं”.
आज सिलसिलेवार तरीक़े से हम इन तमाम नारों की बात करने वाले हैं और आपको बताने बाले हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस चतुराई से इन नारों को गढ़ते हैं. और फिर उन्ही नारों को भूल जाते हैं. और यही नहीं दोस्तों हम बात करने वाले हैं, सैम पित्रोदा ने जो बयान दिया है, उसके पीछे के रहस्य का.

सबसे पहले हम बात करने वाले हैं- मैं भी चौकीदार

मैं भी चौकीदार से पहले क्या हुआ था, मैं पहले आपको बताता हूँ. क्योंकि राहुल गांधी ने एक नारा गढ़ा – चौकीदार ही चोर है”. कि राफ़ेल को लेकर विवाद हो रहा था, उसको लेकर जिस तरह से पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही थी मोदी सरकार में. उसको लेकर उन्होंने एक नारा गढ़ा, जो लोकप्रीय हो रहा था लोगों में. चौकीदार ही चोर के जवाब में आया – “ मैं भी चौकीदार”. अब ये भी दोस्तों एक राजनैतिक बयान था. मगर प्रधानमंत्री की चतुराई देखिये, वो देश की आम जनता के कंधों पर बंदूक रखकर विपक्ष पर हमला बोलने लगे.
वीडियो में देखें सबसे पहले उन्होंने अपने ही पार्टी के नेता आर.के. सिन्हा की फर्म के चौकीदारों से संवाद किया और इस संवाद में उन्होंने चौकीदारों से माफ़ी मांगी. कि आपकी बेईज्ज़ती देश के विपक्ष ने की.
अब देखिये इसमें दिक्कत क्या है ? विपक्ष ने “चौकीदार ही चोर है” जो नारा गढ़ा था, वो आपके लिए गढ़ा था मोदी जी. देश के चौकीदारों के लिए. मगर आप क्या कह रहे हैं. आप उस चौकीदार से माफ़ी मांग रहे हैं, उस चीज़ के लिए जोकि विपक्ष ने किया भी नहीं है. उस चौकीदार को चोर नहीं बताया जा रहा है मोदी जी. ये एक राजनीतिक नारा था, जिसके निशाने पर आप थे. मगर आप क्या कह रहे हैं, आप ये कर रहे हैं कि देश की जनता को दबा कुचा , बेचारा बनाकर कह रहे हैं, कि देखो साहब आप पर हमला किया जा रहा है. लिहाज़ा मैं आपसे माफ़ी मांगता हूँ.
मैं एक चीज़ बताना चाहता हूँ दोस्तों, जब एक परिवार का मुखिया होता है न, और जब उस परिवार पर हमला होता है. तो वो मुखिया सारे हमले को अपने सीने पर लेता है. वो उस हमले को अपने परिवार की तरफ़ जो है डायवर्ट नहीं कर देता है. प्रधानमंत्री यही कर रहे हैं, हमला अगर देश की जनता पर नही हो रहा है, मगर फिर भी वो उस हमले को देश कि जनता पर लाद रहे हैं. ये दिक्कत है यहाँ पर, जी हाँ ये दिक्कत है “ मैं भी चौकीदार हूँ” के इस नारे में. और आप जानते हैं, कि “ मैं भी चौकीदार हूँ” के नारे को लेकर कितना ज़बर्दस्त प्रोपेगेंडा चल रहा है. गाना जो रिलीज़ हुआ है, याद है न आपको.

ये गाना है, और यही नहीं कई पत्रकार भी शामिल हो गए हैं इस प्रोपेगैंडा में. जी हाँ कई पत्रकार अपने ट्वीटर हैंडल से बाक़ायदा चला रहे हैं-“ मैं भी चौकीदार हूँ”. ये है इस पूरे प्रोपेगैंडा के पीछे की हकीक़त.

अब बात करते हैं उनके दूसरे नारों कि, “नामुमकिन अब मुमकिन है” और “मोदी है तो मुमकिन है”

तो मोदी जी मैं ये जानना चाहता हूँ, कि आप हैं तो क्या मुमकिन है? और कौनसा नामुमकिन है, जो अब हो चला है. जब आप सत्ता में आने वाले थे, तब तो आपने कई वादे किये थे न – दो करोड़ नौकरी प्रतिवर्ष, नारी सम्मान. तमाम चीज़ों की बात की जा रही थी. मगर छाए नारी सम्मान हो, सबसे ज़्यादा तौहीन करने वाले नारी की, वो आप ही की पार्टी के विधायक और सांसद सामने उभर कर आते हैं. इसकी ढेरों मिसालें हैं, जिसके बारे में मैं चर्चा पहले भी कर चुका हूँ.
मगर “नामुमकिन अब मुमकिन है” और “मोदी है तो मुमकिन है” मैं दो चीज़ों के साथ जोड़कर देखना चाहूँगा. एक तरफ़ बेरोज़गारी, वो दो करोड़ की नौकरियाँ तो आप नहीं दे पाए हैं सालाना. उल्टा आप गोलपोस्ट लगातार बदलते रहे. ऊपर से जीएसटी और नोटबंदी ने और हालात बर्बाद कर दिए, है ना. अब हम ये जानते हैं पिछले 45 सालों में बेरोज़गारी को लेकर जो इस वक़्त हालात हैं. वो सबसे बदतर दिखाई दे रहे हैं. जो Male Working force है, मतलब जो पुरुष हैं काम करने वाले, उनकी संख्या में भी गिरावट आई है. ये तमाम आंकड़े सरकारी आंकड़े हैं मोदी जी. ये जुमला नहीं हैं. उस सियासत की तरह, जिसकी नुमाइंदगी कभी-कभी आप करते हैं.
इसके अलावा मैं आपको ये भी दिखाना चाहूँगा, किसान की अगर हम बात करें, पिछले 14 सालों में किसान की आय में जो बढ़ोतरी है. वो सबसे कम हुई है. और आप भी जानते हैं, कि किसान आपके लिए सबसे बड़ी मुश्किल हैं, राजनैतिक तौर पर. हालात ये हो गए हैं, कि पिछले दो साल से आपने Farmers suicide ( किसानों की आत्महत्या ) का आंकड़ा ही देना बंद कर दिया है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है, यानि की ख़तरे का और समस्या का आपने समाधान तो नहीं किया, मगर एक शुतुरमुर्ग की तरह आपने अपनी गर्दन जो है, रेत में दफ़न कर दी. जब ख़तरा ही नहीं दिखाई देगा तो ख़तरा किस बात का. तो ये है मोदी सरकार की शुतुर्मुर्गीय सोच. और इसी से जुड़े हैं इनके ये दो नारे –“ मोदी है तो मुमकिन है”, “नामुमकिन अब मुमकिन है”.

अब हम तीसरे नारे पर आते है, “ सबका साथ- सबका विकास”

मेरे ख्याल से सबसे ज़्यादा मज़ाक दोस्तों अगर किसी नारे का लगा है, तो वो इसी नारे का लगा है “ सबका साथ – सबका विकास” मुझे आपको ये बताने की ज़रूरत नहीं है, कि पिछले पांच सालों में गाय के नाम पर किस तरह से लोगों की जानें गई हैं. ये अखलाक़ ये पहलू या फिर हापुड़ में वो बेबस किसान या फिर ऊना में दलितों को मारा जाना. ये महज़ तस्वीरें नहीं हैं. जिन्हें आप आप अपने स्क्रीन पर देख रहे हैं, ये हकीक़तें हैं, जो पिछले पांच साल की हैं.
मगर मैं “सबका साथ – सबका विकास” को एक अलग नज़रिये से देखना चाहूँगा. जब आप सबको अपने साथ जोड़ना चाहते हैं. ठीक है, मगर आपने क्या किया ? न सिर्फ अल्पसंख्यकों और दलितों को टारगेट बनाया गया, बल्कि जो लोग आपसे इत्तेफ़ाक नहीं रखते हैं. आपसे सवाल करते हैं, अपने उन्हें भी हाशिये में ढकेल दिया. पत्रकार जो आपसे सवाल करते थे, आज की तारीख में कोई उन्हें नौकरी नहीं दे रहा है. जो NGO’s हैं, विश्वप्रसिद्ध NGO’s हैं उनके लिए आपने हालात ऐसे पैदा कर दिए, कि उन्होंने अपना बोरिया बिस्तर समेत लिया. इसके आलावा जो एक्टिविस्ट हैं, सामाजिक एक्टिविस्ट हैं. उनके लिए हालात बद से बदतर किये जा रहे हैं. ये कैसे हो सकता है, सबका साथ- सबका विकास.
और ये तो रहा सबका साथ – सबका विकास, इसके अलावा वो तमाम चीज़ें, जिसके लिए जनता आपको चुनकर लाई थी. जिसको लेकर आपने दमदार नारे लगाये थे 2014 से पहले. मई 2014 से पहले, वो नारे मैं नहीं भूला हूँ मोदी जी. आप भूल गए हैं तो नहीं पता. आईये, वो तमाम नारे मैं आपको फिर याद दिलाता हूँ. और आपने फिर किस तरह से अपना रुख बदला. शुरुआत हम करने जा रहे हैं चीन को लेकर जो आपका रुख पहले था, और बाद में आप किस तरह से. इसी तरह से मैं FDI, GST तमाम चीज़ों की बात करने वाला हूँ.

और आपका सदाबहार नारा “ अच्छे दिन आने वाले हैं ”

आपने तो इस नारे से ही पिंड छुड़ा लिया, आपके मंत्री नितिन गडकरी हों या नरेंद्र तोमर, वो तो कहते हैं कि साहब ये तो हमारा नारा ही नहीं था, ये तो मनमोहन सिंह का नारा था. देखिये आपने देश की जनता को मूर्ख बना दिया, सत्ता में आ गए और अब उस नारे को ही आप नहीं पहचानते हैं.
वो राजकपूर की फ़िल्म थी न दोस्तों, “ छलिया ” बहुत ख़ूबसूरत फ़िल्म थी. ब्लैक एंड व्हाईट फ़िल्म थी और उसमें एक गाना था. क्या गाना था वो –“ छलिया मेरा नाम, छलिया मेरा नाम, हिंदू मुस्लिम सिख इसाई, सबको मेरा सलाम”. हम इसमें तनिक ट्विस्ट करते हैं – “ छलिया मेरा नाम, छलिया मेरा नाम, विकास को मैंने जुमला कर दिया, सबको मेरा सलाम”. बुरा मत मानियेगा, क्योंकि देखिये भगवान श्रीकृष्ण के लिए भी एक ज़माने में छलिया शब्द का इस्तेमाल हुआ था, तो मोदीभक्त मेरी इस बात का बुरा न मानें.

ये तो हमने बात की उन तमाम नारों की, और हक़ीक़त ये है दोस्तों की ये नारे ही, कहीं न कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शासन हैं.

अब बात करते हैं, हम एक दूसरे विषय की. ये बहुत ही रहस्मयी विषय है दोस्तों, एक ऐसा वक़्त जब पहले चरण के मतदान में बीस दिन का वक़्त भी नहीं है. कांग्रेस का जो मैनिफेस्टो बनाते हैं सैम पित्रोदा. ओवरसीज़ कांग्रेस के सरबराह हैं वो, अचानक उनका ये बयान आ जाता है, और वो बयान किस पे आता है पुलवामा पर आता है. वो बयान किस पे आता है दोस्तों, वो बयान आता है 26 / 11 पर. वो क्या कहते हैं, आपने देखा होगा प्रधानमंत्री ने भी उन पर क़रारा हमला बोला है.
सैम पित्रोदा कहते हैं और मैंने ये बयान मैंने न्यूयार्क टाईम्स पर भी पढ़ा है. कि जब हमने हमला किया था, तो क्या वाक़ई हमने 300 लोग मारे थे ? अब इसके जवाबा में प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष हमारे सैनिकोण की बार-बार बेईज्ज़ती करती है, मैं अपने भारतीयों से अपील करता हूँ कि वो विपक्ष से उनके बयानों पे सवाल करे. उनसे कहें कि 130 करोड़ भारतीय कभी माफ़ नहीं करेंगे विपक्ष को उनके इन ANTICS के लिए. भारत अपने सैनिकों के साथ खड़ा है.

एक तो मैं समझ नहीं पा रहा हूँ, कि अगर आप कांग्रेस का मैनिफेस्टो बना रहे हैं, तो इस वक़्त पुलवामा की तरफ़ या जो 26 / 11 की तरफ़ पूरे संवाद को क्यों धकेल रहे हैं. आप किसकी टीम में हैं सैम पित्रोदा साहब ? ये तो बताईये. तो ये बहुत ही रहस्मयी बयान है. और ये इंटरव्यू उन्होंने दिया है ANI को, वो संस्था, वो एजेंसी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मोदी सरकार की पिछलग्गू है. तो ये इंटरव्यू आपने क्यों दिया? बहुत से रहस्य बने हुए हैं, कोई भी इंटरव्यू ANI ऐसे ही नही करता. मेरे सोर्सेज़ मुझे बता रहे हैं, ANI अपने दम पर कभी ऐसे इंटरव्यूज़ नहीं करता. उसे कहा जाता है, कि आप ऐसे इंटरव्यूज़ कीजिये. तो सैम पित्रोदा ये तमाम बातें क्यों कर रहे हैं.

चलिए पहली मैं पूछना चाहूँगा, कि जब सैम पित्रोदा ये कह रहे हैं, कि 300 लोग मारे गए हैं, कि नहीं मारे गए. जिसको लेकर आप कह रहे हैं, जिसको लेकर आप कह रहे हैं, कि ये हमारे सैनिकों की तौहीन है. मोदी जी, तो मैं आपसे दो चीज़ें पूछना चाहता हूँ. अमित शाह, राधामोहन सिंह, ये तमाम आपके नेता मृत आतंकवादियों के अलग-अलग आंकड़े देते रहे. कोई 250 बता रहा था, कोई 600 बता रहा था. जबकि इंडियन एयरफोर्स में एयर चीफ़ मार्शल धनोआ ने कहा कि आंकड़े बताना मेरा काम नहीं है. खुद एयरफ़ोर्स आंकड़े नहीं बता रहा है. और जब ये मां जिसका बेटा पुलवामा में मारा गया था, शामली की ये मां जब कह रही थी, कि मुझे तुम लाशें बताओ. आप इसे भी देशद्रोही क़रार देंगे प्रधानमंत्री जी? (वीडियो में 17:12 पर देखें शहीद की मां क्या कह रही हैं )
तो बहुत ही रहस्मयी बात है, कि अब जाकर आख़िर क्यों सैम पित्रोदा ये बातें कर रहे हैं ? क्योंकि कोई भी व्यक्ति, देखिये कोई भी व्यक्ति जानता है, कि किस तरह से BJP ने पुलवामा को लेकर भुनाने की कोशिश, लगातार उन्होंने इस मुद्दे को भुनाया. और न सिर्फ उन्होंने इस मुद्दे को भुनाया सियासी तौर पर, बल्कि उनकी जो आलोचना हो रही थी अलग-अलग मुद्दों को लेकर. वो तमाम चीज़ें गायब हो गईं. उन्होंने पुलवामा पर ज़बर्दस्त सियासत की. शहादत के ही अगले दिन amit शाह, खुद प्रधानमंत्री इस पर वोट मांगते दिखाई दिए. इन तमाम मुद्दों को मीडिया ने नहीं उठाया. अब सैम पित्रोदा ने जो बात कही है, उसको लेकर मीडिया इसे लपक लेगा और कांग्रेस के लिए एक और मुश्किल. खैर आप खुद सोचिये, इस वक़्त आखिर सैम पित्रोदा ये बात क्यों कह रहे हैं ? इसके पीछे की सोच क्या है , ये मैं आप पर छोड़ता हूँ.

नोट : HW न्यूज़ पर अभिसार शर्मा के शो सुनिये सरकार पर बोले गए अभिसार शर्मा के शब्दों को हमने टैक्स्ट में आपके सामने प्रस्तुत किया है।

HW न्यूज़ पर आप इस विषय पर वीडियो भी देख सकते हैं, देखें वीडियों

About Author

Abhisar Sharma