ऑटोमाबाइल कंपनी मर्सडीज बेंज ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अगर सरकार दिल्ली में डीजल गाड़ियों से बैन हटाती है, तो वह एन्वायरन्मेंट टैक्स देने को तैयार है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मर्सडीज ने 2000 सीसी से ज्यादा की डीजल गाड़ियों पर बैन हटाने की मांग की है। अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। ज्ञात हो,की मर्सिडीज़ बेंज एक जर्मन कंपनी है जो लग्ज़री गाड़ियां बनाती है!
> इसी बीच सोमवार को मर्सडीज के वकील ने कोर्ट में कहा कि कंपनी भारत में प्रदूषण के तय मानकों के आधार पर ही गाड़ियां बना रही है।
> कंपनी ने ये भी कहा कि पॉल्यूशन के खिलाफ लड़ाई में शामिल है।
> सुप्रीम कोर्ट ने 2000 सीसी से ज्यादा की डीजल गाड़ियों के गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर 31 मार्च 2016 तक रोक लगा दी थी।
इसके बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा, मर्सडीज और टोयोटा ने सुप्रीम कोर्ट से यह वैन हटाने की मांग की है।
> ऑटोमोबाइल कंपनियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस बैन को आगे बढ़ा दिया गया था।
> इसके अलावा, 10 साल से ज्यादा पुराने ट्रकों की भी दिल्ली में एंट्री पर बैन लगाया गया है।
> इसके बाद मर्सडीज ने सभी मॉडलों के पेट्रोल वर्जन लाने की घोषणा की थी।
बड़ी कार निर्माता कंपनियों के डीजल गाड़ियां बेचने पर लगाए गए बैन को हटाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट सख्त कमेंट्स कर चुका है। कोर्ट ने कार कंपनि‍यों से कहा कि‍ वे यह साबि‍त करें कि‍ डीजल कारों से पॉल्यूशन नहीं फैलता। कोर्ट ने यह भी सवाल किया था कि‍ क्‍या एसयूवी कारें पॉल्यूशन नहीं, ऑक्‍सीजन देती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2015 को 2000 सीसी से अधिक के व्हीकल्स के रजिस्ट्रेशन पर यह रोक लगाई थी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल गाड़ि‍यों पर बैन लगाने के एनजीटी के ऑर्डर को चुनौती देने वाली पिटीशन भी खारिज कर चुका है।

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