December 8, 2021
उत्तरप्रदेश

मंगल पांडे को लेकर "1857 राष्ट्रवादी मंच" की इस मांग को, क्या पूरा कर पायेगी योगी सरकार?

मंगल पांडे को लेकर "1857 राष्ट्रवादी मंच" की इस मांग को, क्या पूरा कर पायेगी योगी सरकार?

1857 जंग-ए-आज़ादी की 161वी जयन्ती के उपलक्ष मे, 1857 राष्ट्रवादी फोरम ने लखनऊ के शेरोज़ कैफे मे एक प्रेस कॉन्फरेंस का आयोजन किया।
प्रेस को सम्बोधित करते हुए, मंच के संयोजक श्री अमरेश मिश्र ने 1857 की 161वी वर्षगांठ को मनाने हेतु, पहले डेढ़ माह का कार्यक्रम रखा। इसके तीन प्रमुख बिन्दु हैं:

  1. मंच द्वारा अमर शहीद मंगल पाण्डे की विशाल प्रतिमा का निर्माण।
  2. 5 से 22 जून तक अवध और पूर्वांचल मे ‘मंगल पाण्डे राष्ट्रवादी-जन जागरण यात्रा’ का आयोजन।
  3. 30 जून, चिनहट विजय दिवस के दिन, उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने, शहीद मंगल पाण्डे की प्रतिमा की विधिवत स्थापना।

प्रेस से बात करते हुए, श्री मिश्र ने कहा कि, “हम 1857 राष्ट्रवादी मंच के लोग, सरकार से नही मांग कर रहे की वो 30 जून को विधान सभा के सामने प्रतिमा लगाये। हम permission नही ले रहे। सबसे पहले हम अपने व्यय से प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं। फिर 5 से 22 जून तक, प्रतिमा को लेकर अवध और पूर्वांचल के गांव-गांव मे यात्रा होगी। और 30 जून को हज़ारों लागों को लेकर विधान सभा पर प्रतिमा लगाऊंगा। जो कोई भी हमे रोकने की कोशिश करेगा, राष्ट्र-विरोधी कहलाया जायेगा”।
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए श्री मिश्र ने कहा कि, “मेरठ के इलावा, मंगल पाण्डे की प्रतिमा पूरे उत्तर प्रदेश मे कहीं नही है। जबकि उत्तर प्रदेश उनका गृह प्रान्त है। यह बेहद शर्मनाक बात है। मंगल पाण्डे किसी एक प्रान्त के नही हैं। पर उत्तर प्रदेश मे ही उसके सबसे बड़े बेटे की प्रतिमा का न होना दुखद है। किसी और देश मे क्रान्तिकारियों का इस तरह अपमान नही होता। मुझे लगता है की 30 जून को मंगल पाण्डे की उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने प्रतिमा लगने से एक अच्छा राष्ट्रवादी सन्देश जायेगा। भारत की खोई गरिमा पाने हेतु एक नये आन्दोलन की शुरुआत होगी। भारत के खोये ज्ञान, विज्ञान और मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने मे योगदान पर फिर से चर्चा होगी। देश मे विघटनकारी ताक़तें कमज़ोर होंगी। और युवाओं मे एक नयी ऊर्जा का संचार होगा”।
प्रेस के आगे किसान क्रान्ति दल के महामंत्री श्री रामजी तिवारी ने कहा की, “1857 की लड़ाई किसान लड़े। मंगल पाण्डे खुद किसान थे। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का राज, किसान विद्रोह ने ही खत्म किया। पर आज किसान की हालत बद से बदतर है। किसानो की न्यूनतम आय तै नही है। कर्जा माफी नही हुई। खेती को जानबूझ कर हाशिये पर किया जा रहा है। लेकिन हम किसान एसा नही होने देगें। हम लोग 1857 के बव्चे हैं। सारे राष्ट्रविरोधी मंसूबे ध्वस्त हो जायेंगे। हम श्री मिश्र का पूरा सहयोग करेंगे”।
अमरेश मिश्र
संयोजक
1857 राष्ट्रवादी मंच

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