पूरे देश की निगाहें यदि किसी सीट पर थी, तो वो सीट भोपाल थी. यह सीट बनारस से भी ज़्यादा चर्चा का विषय रही. इस सीट पर एक तरफ जहाँ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मैदान में थे, तो वहीं दूसरी ओर भाजपा ने मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को मैदान में उतारा था.

भोपाल सीट से प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को 3 लाख से अधिक मतों से पराजित किया है. प्रज्ञा ठाकुर अंतिम चरण की वोटिंग में नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताकर चर्चा में आई थीं.

दिग्विजय सिंह ने प्रज्ञा ठाकुर से चुनाव जीतने के लिए सारे साम दम , दंड भेद अपना लिए थे. पर प्रज्ञा ठाकुर ने जनता के बीच जाकर विक्टिम कार्ड खेला, जिसपर वो सफ़ल भी हुईं. प्रज्ञा ठाकुर की इस जीत को देश के मूंड को मापने का एक पैमाना भी बनाया जा सकता है. कि देश किस तरह से हिंदुत्व और सांप्रदायिक राजनीति के उफान के इस दौर में नफ़रत की गहराईयों से गुज़र रहा है.