राजस्थान विश्वविद्यालय 8 जनवरी 2018 को 72वें साल में प्रवेश कर रहा है. लेकिन उम्र के साथ राजस्थान विश्वविद्यालय की शिक्षा में निखरने की बजाय, साख लगातार गिरती ही जा रही है.
एक समय था जब राजपूताना के नाम से और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय के से पुरे विश्वभर में प्रसिद्ध था और पुरे विश्वभर से विदेशी छात्र यहाँ शिक्षा के लिए आते थे. किसी समय में विश्वभर में एक बार तो आरयू ने विदेशियों को भी पढ़ाई के लिए अपनी ओर खींचा था, लेकिन अब हालात विपरीत हैं.
विदेशी छात्र के नाम पर आरयू में नाम मात्र के छात्र अध्ययन कर रहे हैं. कई कोर्स तो मरणासन्न स्थिति में हैं, तो कई कोर्स अब बंद होकर इतिहास बन गए हैं.
सरकार और राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन के बेरुखी का अगर ये ही आलम रहा, तो हाल और भी बदतर होने में देर नहीं लगेंगी.

आरयू में 38 विभाग, 15 शोध केन्द्र, छह संघटक महाविद्यालय चल रहे है. इनमें 37 पीएचडी कोर्सेज, 28 एमफिल पाठ्यक्रम, 50 स्नातकोत्तर, 15 स्नातक पाठ्यक्रम, 21 पीजी डिप्लोमा, 12 डिप्लोमा व सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित है. इनमें 26 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत है.

राजस्थान विश्वविद्यालय के इस कगार पर पहुँचाने वाले कारक

  • शिक्षकों की कमी.
  • संविदा पर काम चलाऊ नीति.
  • पढ़ाई का गिरता माहौल के कारण विद्यार्थियों का मोहभंग हो रहा है.
  • यहां से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी बेरोजगार की श्रेणी में पहुंच रहे हैं,
  • उन्हें आरयू प्रशासन की ओर से रोजगार मुहैया भी नहीं करवा जा रहा है.
  •  विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट सेल तो है.
  • लेकिन यह प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर रही है.

नैक ने दी ए ग्रेड
विश्वविद्यालय को यूजीसी की राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (एनएएसी) ने 2016 में आरयू को ए ग्रेड प्रदान की है. इससे पहले 3 मई 2004 में ए प्लस ग्रेड दी थी, जो कि 2009 तक मान्य थी.
ये हैं नामचीन हस्तियां 
चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, उद्योगमंत्री राजपाल सिंह शेखावत, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी, ग्रामीण एवं पंचायतीराज मंत्री डॉ. राजेन्द्र राठौड़, देश के नव-गठित नीति आयोग का प्रथम उपाध्यक्ष प्रो.अरविन्द पानगड़िया, पद्मश्री डॉ. अशोक पानगड़िया, प्रो. केएल कमल, पूर्व सांसद महेश जोशी, विधायक डॉ. कैलाश वर्मा, विधायक हनुमान बेनिवाल, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुला, पूर्व राज्यपाल नवल किशोर शर्मा सहित अन्य लोग विश्वविद्यालय से ही पढ़े हुए हैं. देश-विदेश के ख्याति प्राप्त विद्वान प्रो. राजा चेलैया, प्रो. राजकृण, प्रो. एलएसस्वामी, प्रो. सीवी सुब्रह्मण्य, प्रो. आरसी मेहरोत्रा, प्रो. आर. रंगराजन, प्रो. बीएल सराफ, प्रो.वीआर मेहता, प्रो. दयाकृष्ण सहित अन्य लोगों का भी जुड़ाव रहा है.

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सुभाष बगड़िया

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