बीते वर्ष हरियाणा में हुए गीता जयंती महोत्सव ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. एक बार फिर अब ये महोत्सव चर्चा में आ गया है. एक आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ है कि हरियाणा सरकार ने गीता की 10 कॉपियां खरीदने पर लगभग 3.8 लाख रुपये का खर्चा किया है. यानी एक भगवत गीता की किताब को खरीदने पर कुल 38,000 रुपये खर्च किए गए. खुलासे के बाद एक बार फिर खट्टर सरकार सवालों के घेरे में है.

ये चौकानें वाले खुलासे:

  • गीता की 10 कॉपियां वीआईपी लोगों को गिफ्ट करने के लिए खरीदी थीं. जिनकी कीमत 3.8 लाख रुपय बताई गयी.
  • वहीं बच्चों के रिफ्रेशमेंट के नाम पर सरकार 25 लाख से ज्यादा के खर्च की बात कह रही है. गीता के श्लोकोच्चारण में बुलाए गए 18000 स्कूली बच्चों के रिफ्रेशमेंट के लिए 25 लाख रूपए का खर्च दिखाया गया है.
  • इस महोत्सव में शामिल हुई भाजपा की सांसद हेमा मालिनी ने 20 लाख और मनोज तिवारी को 10 लाख रुपए दिए गए थे.
  • आंकड़े में करीब 20 कल्चरल प्रोग्राम पर लगभग 4 करोड़, 61 हजार रूपए खर्च किए गए हैं, गीता जयंती के दौरान इन्विटेशन कार्डों का खर्च 54,299 रूपए दिखाया गया है.
  • कार्यक्रम में विजिटरों का इंश्योरेंस भी किया गया था, इस इंश्योरेंस के लिए करीब 5 लाख 90 हजार रूपए खर्च किए गए.
  • वहीं मैराथन रेस में इनाम बांटने के लिए खर्च की राशि 6 लाख 90 हजार रुपए दिखाई गई है.

इस महोत्सव पर सरकार ने 15 करोड़ से ज्यादा खर्च किए थे, सरकार ने जहां-जहां पैसा खर्च किया, उसके आंकडे आरटीआई से सामने आने के बाद विपक्ष ने इसमें बड़े घोटाले की बात कही है.

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सुभाष बगड़िया

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