क्या किसी व्यंजन को बनाने और खाने पर भी जुर्माना हो सकता है. जी हाँ , ऐसा हुआ है दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों ने बिरयानी बनाई तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन पर 6000 रुपये का जुर्माना लगाया है. सुनने में हास्यास्पद लगता है, पर यह सत्य है. न सिर्फ जुर्माना लगाया गया है, बल्कि भाजपा नेता सुब्रमन्यम स्वामी ने तो एक क़दम आगे बढ़ाते हुए  बिरयानी बनाने वाले छात्रों को जेल भेजने की मांग की है.

ख़बरों के अनुसार एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक के पास ये चारों छात्र बिरयानी बना रहे थे. मुख्य प्रॉक्टर कौशल कुमार की ओर से जारी नोटिस के अनुसार चार छात्रों पर 6,000 रूपए और 10,000 रुपये के बीच जुर्माना लगाया गया है. यही नहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जुर्माना चुकाने के लिए उन्हें 10 दिन का समय दिया है साथ ही कहा है कि यदि वे जुर्माना नहीं भरते हैं तो उन पर सख्त कार्रवाई होगी.

जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के महासचिव शत्रुपा चक्रवर्ती पर यूनिवर्सिटी ने 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. वहीं एक और छात्र आमिर मालिक सहित चार छात्रों पर 6 से दस हज़ार के बीच में अलग-अलग जुर्माना लगाया गया है. ज्ञात होकि शत्रुपा को विरोध प्रदर्शन करने और उसी दिन बिरयानी पकाने से पहले वीसी कार्यालय में नारे लगाने का दोषी पाया गया था. 27 जून को तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष मोहित कुमार पांडे और महासचिव शत्रुपा छात्रों के मुद्दे पर वीसी से मिलने गये थे तब उन्होंने वीसी के बात ना सुनने पर वहां से जाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद ही उन्होंने कथित रूप से बिरयानी पकाई थी.

वहीं भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी ने कहा कि आमिर मलिक ने विश्वविद्यालय में बीफ बिरयानी बनाई. कांग्रेस नेता शाहजाद पूनावाला का कहना है कि जेएनयू का प्रशासन अब बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है. बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि छात्र को किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए लेकिन बिरयानी बनाकर खाने में कुछ भी गलत नहीं है.

छात्रों को जो आदेश जारी किया गया है उसमें लिखा है, ‘आपको एडमिन ब्लॉक के पास स्थित सीढि़यों के पास बिरयानी पकाने और खाने का दोषी पाया जाता है.’ ज्ञात होकि एबीवीपी की ओर से जारी प्रचार के बाद यह जुर्माना छात्रों पर लगाया गया है,और इस वजह से यह मुद्दा एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. एबीवीपी का आरोप है कि इस मौके पर यूनिवर्सिटी में बीफ पकाया गया था. वहीं इस फ़ैसले की आलोचना करने वालों का कहना है, कि यदि यह अनुशासनात्मक कार्यवाही होती और सिर्फ खाना बनाने का दोषी पाया जाता नाकि बिरयानी बनाने का दोषी.