भारत में महिलाओं की स्थिति में पिछली कुछ सदियों में काफी बदलाव आए हैं, हालांकि आज भी महिला सुरक्षा प्रमुख मुद्दा बना हुआ है.प्राचीन काल में पुरुषों के साथ बराबरी की स्थिति से लेकर मध्ययुगीन काल के निम्न स्तरीय जीवन और साथ ही कई सुधारकों द्वारा समान अधिकारों को बढ़ावा दिए जाने तक, भारत में महिलाओं का इतिहास काफी गतिशील रहा है.आधुनिक भारत में महिलाएं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोक सभा अध्यक्ष, प्रतिपक्ष की नेता आदि जैसे शीर्ष पदों पर आसीन हुई हैं. एक ऐसी ही शख्सियत हैं एम.फ़ातिमा बीबी.
जस्टिस एम. फातिमा बीबी 1989 में भारत की पहली महिला जज बनीं. भारत ही नहीं पूरे एशिया में वो इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला थीं.
फ़ातिमा बीबी का जन्म 30 अप्रैल 1927 को एक मुस्लिम परिवार में हुआ. पथानाम्थित्ता, केरल में पैदा हुईं फ़ातिमा के पिता का नाम मीर साहिब और माँ का नाम ख़दीजा बीबी था. उन्होंने अपनी शुरुवाती पढ़ाई अपने पैदाइश के शहर से की थी और बाद में त्रिवेंद्रम से बी.एस.सी. की पढ़ाई की. थिरुवनंतपुरम से फ़ातिमा ने बी.एल. की डिग्री प्राप्त की.
1989 में राजीव गाँधी सरकार में इन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया और ये तब पहला मौक़ा था कि किसी महिला को हिन्दुस्तान में जज बनाया गया हो. 1997 से 2001 के बीच वो तमिलनाडू की राज्यपाल भी रहीं हैं .

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Durgesh Dehriya

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