विचार स्तम्भ

नज़रिया – हमारा नेता कैसा हो?

नज़रिया – हमारा नेता कैसा हो?

कल गुजरात चुनाव है. 5 साल बाद डोर फिर से जनता के हाथ में है. जनता को भी ध्यान रखना चाहिए को मलिक नहीं अपना सेवक चुन रही है. इसी मौके पर हम आपको बता रहे है अपना जनप्रतिनिधि कैसा हो. 
सबसे पहले उम्मीदवार हमारे पास वोट मांगने आता/ती  है. कायदे से वो अपनी नीतियां और हमारी समस्याओं का समाधान वो बताता/ती है. और फिर हमको परख के अपना मत प्रदान करना होता है. जहां चुनाव होता है, वहाँ सरकार और पूरा सरकारी तंत्र चुनावी चौसर में अपनी ताल ठोकती है.  हर तरह के वादे जनता को दिखाये जाते है. फिर चुनाव के बाद जन प्रतिनिधियों का आदर करना तो हमारा दायित्व है. लेकिन जनप्रतिनिधियो को भी याद रखना चाहिये कि जनता के मत से ही हम जनता के  प्रतिनिधि चुनें गये है. लेकिन अक्सर हमारे नेता जनता के दायित्व निर्वाह करने के बजाय जनता को गुमराह करने की कोशिश करते है.  चुनावी मौसम में हर नेता बाज़ी मारने की कोशिश करता है और नए-नए जुमले गढ़ता है. लेकिन चुनाव के परिणाम के बाद उन वादों पर अमल नहीं किया जाता है. जननायक ईमानदारी से काम करें तो जनता के सामने हाय तौबा मचाने की ज़रूरत नहीं होती है.  काम कम दिखावा ज़्यादा होता है. जनता की सेवा करने की बजाय मेवा खाने की आदत ज़्यादा है. इस देश ग़ुलामी की ज़ंजीरों से मुक्त करवाने वालों स्वार्थ था कि हमारी भावी पिढी सुख से जिए लेकिन वर्तमान हालात तो इतने अच्छे नहीं है. हर सही ग़लत काम को चुनावी रंग देना हमारी आदत बन गयी है. कोई  इमानदारी से काम करने वाले को तंग करना तो फैशन सा हो गया है. हर काम करने वाले व्यक्ति को नेताजी के नाम से धमकाया जाता है.

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साभार:राजस्थान पत्रिका.

हमको याद रखना चाहिये कि देश के हर नागरिक के मत की कीमत बराबर होती है. चाहे हो व्यापारी हो या मजदूर हो या किसान.  माननीय नेताजी जनता से बढ़कर तो है नहीं. सता सुख भोगने के बजाय देश के लिये कुछ करेंगे तो ही हमारे पूर्वज गांधी, नेहरू पटेल,बोस,तिलक और लालालाजपतराय का फ़र्ज़ चुकाने की मंशा  हमारे जननायको में होनी चाहिये. जो राजनीति का स्तर गिर चूका है उसको साफ़ सुथरा बनाना भी जरूरी है. देश  के राजनीतिक मंदिर संसद में जनता से जुड़े हुए मुद्दे पर विचार होना चाहिए.  वहां के शौर-शराबे में जनता की असली मुद्दे दब से जाते है.
अंत में यही कि नेता भगवन तो है नहीं तो उसको पूजना वाला ट्रेंड तो बिलकुल ही छोड़ देना चाहिए. और नेता ऐसा चुने कि वो आपकी आवाज सरकार तक पहुंचाए और हर मुश्किल में हमारे साथ आकर कंधे से कन्धा मिलकर चले.

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