6 दिसम्बर से भारतीय टेलीकॉम बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली रिलायंस समूह की जियो ने मोबाइल टैरिफ़ के अलग-अलग प्लान में 40% तक बढ़ोतरी की घोषणा की है। दिसम्बर से दूसरी टेलीकॉम कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ बढ़ा दिया है लेकिन उनकी मजबूरी है।

बढ़ते घाटे के कारण एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है, जबकि जियो लाभ कमा रहा है। इन दोनो कम्पनियों ने भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में अभी तक का सबसे बड़ा 74 हजार करोड़ रुपये तिमाही घाटा झेला है। जबकि रिलांयस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 18.32 फीसदी का मुनाफा हुआ है। इस मुनाफे में जियो की बड़ी हिस्सेदारी है। इस बढ़ते हुए मुनाफे के कारण मुकेश अम्बानी विश्व के नौवे नम्बर के अमीर बन गए हैं।

आज की स्थिति यह है कि वोडाफोन आइडिया के पास 37.5 करोड़ ग्राहक हैं। वहीं एयरटेल के पास 32.79 करोड़ ग्राहक हैं। वहीं रिलायंस जियो के पास 34.8 करोड़ ग्राहक हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल के पास संयुक्त तौर पर 70 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। यह कम्पनियां बड़ा घाटा झेल रही है, इसलिए इनका शुल्क वृद्धि करना जायज लगता है।

सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर भी कह रहे हैं कि ‘टेलीकॉम सेक्टर की बड़ी कंपनियों पर सात लाख करोड़ रुपये के अनुमानित भारी-भरकम कर्ज हैं। कर्ज से न सिर्फ इन कंपनियों के अस्तित्व के लिये चुनौती उपस्थित हो रही है। राष्ट्रीय महत्व के इस क्षेत्र की जीवंतता के लिये इसकी मदद जरूरी है’ यह बात फिक्की के अध्यक्ष संदीप सोमानी ने भी कह रहे हैँ, कि ‘एजीआर पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय से न केवल दूरसंचार क्षेत्र धाराशायी हुआ है। बल्कि इसका बिजली, इस्पात और रेलवे समेत दूसरे क्षेत्रों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा’ इसलिए इन कम्पनियों को मदद की जरूरत है।

यानी यह बड़ी 2 कंपनियां गहरी मुश्किल में हैं, उन्हें वित्तमंत्री ने 2 साल की छूट दी है। लेकिन जियो की क्या मजबूरी है, जो उसे 40 प्रतिशत कीमत बढ़ाना पड़ रही है? इसका सीधा अर्थ यह है कि लाभ में होते हुए भी वह पब्लिक को लूटने से बाज नही आ रहा है। आप सोचिए कि तब क्या होगा जब वह इस क्षेत्र में अकेला खिलाड़ी बचेगा?

यही बात है, जो आपको हमको सबको पूछना चाहिए लेकिन कोई नही पूछता है। लोग मोदी भक्त से ज्यादा जियो के भक्त बने हुए हैं। उन्हें लगता है मुकेश अम्बानी ओर अडानी जैसे पूंजीपति तो देवता हैं। जबकि सच यह है कि इन नए पूंजीपतियों का दीन ईमान सिर्फ पैसा है। जनता का हित नही!…..यह बात जानते सभी है, लेकिन समझना नही चाहते हैं।