मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह अपने विवादित शब्दों के लिए आजकल चर्चा में हैं। नागरिकता संशोधन कानून और NRC के विरोध में हो रहे देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान मेरठ में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में प्रदर्शन उग्र हो जाने के बाद स्थानीय बुजुर्गों को धमकाने का वीडियो सामने आया था। जिसके बाद से ही मेरठ सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह की कार्यशैली और भाषा पर सवाल उठ रहे हैं।
उक्त वायरल वीडियो में मेरठ सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह मुस्लिमों से कह रहे हैं। पाकिस्तान चले जाओ, खाते यहाँ का हो और गाते वहाँ का हो। साथ ही उन्होंने कहा कि ज़िंदगी काली हो जाएगी। वीडियो के वायरल होने के बाद हर तरफ उनके इस कृत्य की आलोचन हो रही है।
इसी बीच अखिलेश एन सिंह की विवादित कार्यशैली के कई किस्से सामने या रहे हैं, 2019 अगस्त माह में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ में एबीवीपी का कार्यकर्ता और जर्नलिज्म का स्टूडेंट कादिर अली की मौत से जुड़ा हुआ मामला भी ऐसा ही है। इस घटना के संबंध में पत्रकार आवेश तिवारी ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है। उन्होंने खुलासा किया कि एक व्यक्ति जिसने पुलिस के सामने सरेंडर करने के लिए के लिए थाने का रुख किया और जब वह गया तो वापस उसकी लाश आई और उसे पुलिस ने मुठभेड़ का नाम दे दिया।

देखें इस संबंध में पत्रकार आवेश तिवारी की फ़ेसबुक पोस्ट


अगस्त 2019, कादिर अली, हां कादिर अली नाम था उसका । जर्नलिज्म का स्टूडेंट था चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ में और एबीवीपी का कार्यकर्ता था। उत्तर प्रदेश के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर अशोक कटारिया कैंपस में आने वाले थे, उसी दिन कैम्पस में छात्रों के बीच गोली चली। सात लोग नामजद किये गए उसमे से एक नाम कादिर अली का था जो घटना के वक्त सिटी हास्पिटल में था यूनिवर्सिटी में नही। कादिर अली घर से फरार हो गया। उसके चाचा बासित अली उर्दू एकेडमी के सदस्य थे।
पुलिस ने एक सप्ताह बीतने के बाद कादिर पर 20 हजार का इनाम घोषित कर दिया। कादिर के घर वाले परेशान हुए तो उन्होंने कादिर से सरेंडर करने को कहा। कादिर के भाई साजिद अली ने एसपी सिटी को जानकारी दी कि कादिर सरेंडर करना चाहता है। एसपी सिटी ने कहा ठीक है। कादिर सरेंडर करने सिविल लाइन थाना गया। अगले दिन उसकी लाश मिली। पुलिस ने कहा भागने की कोशिश कर रहा था मुठभेड़ में मारा गया। अब सवाल उठता है वह एसपी सिटी कौन था? जी हां उसका नाम अखिलेश नारायण सिंह था।

सरेंडर करने गया व्यक्ति आखिर कैसे भागने की कोशिश करेगा ?

जब हमने इस घटना के संबंध में उस समय मीडिया पर आई खबरों की तरफ रुख किया, तो हमने पाया कि बहुत से लोगों ने इस मुठभेड़ पर सवाल खड़े किये थे। अमर उजाला के पोर्टल पर हमने इस संबंध में पब्लिश हुई एक स्टोरी का अध्ययन किया, और हमें पाया कि पुलिस द्वारा इस मुठभेड़ की जो थ्योरी पेश की गई थी, वो कई सवाल खड़े करती है।
ज़रा पुलिस द्वारा पेश की गई थ्योरी को भी जान लीजिए, उस समय मेरठ पुलिस द्वारा जो थ्योरी पेश की गई थी। उसके मुताबिक क़ादिर अली ने पुलिस की बंदूक छुड़ाकर भागने की कोशिश की थी। जिसके बाद उसे पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया।

इस थ्योरी पर 30 अगस्त 2019 को अमर उजाला ने सवाल उठाते हुए लिखा है

सिविल लाइन में करीब 10 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में आरोपी कादिर ने सरेंडर किया। भाजपा नेता और परिजन उसके साथ मौजूद थे। वहीं, आरोपी पांच पुलिसकर्मियों के बीच में दरोगा से पिस्टल छीनकर गोली चला देता है। सवाल उठता है कि अगर कादिर को पुलिस से भागना ही था तो थाने जाकर परिजनों के साथ सरेंडर क्यों किया। इसको लेकर भी जांच होने की जरूरत है।

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