उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप काण्ड जैसा मामला सामने आया है. इस मामले के सामने आने के बाद महिला सुरक्षा पर सरकारी दावों की पोल खुलती नज़र आ रही है.

यूपी के देवरिया जिले के मां विन्ध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सामाजिक सेवा संस्थान में अनियमितताओं को लेकर सीबीआई जांच चल रही थी और आर्थिक अनुदान बंद कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद बालिका  संचालिका हाईकोर्ट का धौंस दिखाकर संस्था को चला रही थी.

मामला तब सामने आया जब बालिका गृह से भागकर एक बच्ची ने महिला थाने जाकर पुलिस से गुहार लगाई. एसपी के निर्देश पर संस्था से 24 बच्चों व महिलाओं को मुक्त कराते हुए उसे सील कर दिया गया. कार्यवाही को अंजाम देते हए पुलिस द्वारा बालिका गृह संचालिका, अधीक्षक समेत तीन अन्य को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस का दावा है कि 18 बच्चे अब भी इस संस्था से गायब हैं, जिनके बारे में पता लगाया जा रहा है.

ज्ञात होकि कुछ दिन पूर्व ही मुज़फ्फ़रपुर के बालिका गृह में भी ऐसा मामला सामने आया था. जिसके बाद नितीश सरकार की काफी आलोचना हुई. मुज़फ्फ़रपुर काण्ड का आरोपी मंत्री मंजू वर्मा के पति का करीबी भी बताया जाता है.

देश में बढ़ रही इस तरह की घटनाओं के बाद ये कहा जा रहा है कि महिलाओं और बालिकाओं के लिए देशा सुरक्षित होता जा रहा है. ऐसे में देखना ये है कि सरकार द्वारा महिला सुरक्षा के लिए क्या कार्य किये जाते हैं. क्या दोषियों को सज़ा दिला पाने में सरकार कामयाब हो पाएगी?