यह हालत हो गयी हैं सरकार की. सैलेरी देने के पैसे नही है. टेलिकॉम इतिहास में यह पहली बार है जब 1 लाख 76 हजार बीएसएनएल के कर्मचारियों को सैलरी नही मिली है. इससे पहले कंपनी के कर्मचारियों का यात्रा भत्ता (टीए) बंद कर दिया गया है और मेडिकल भत्ता भी कम किया जा रहा है.

कर्मचारियों का कहना है कि मोदी सरकार बीएसएनएल को बंद करने की साजिश कर रही है. बीएसएनएल के शीर्ष अधिकारियों की केंद्रीय दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन के साथ बैठक हुई है,बैठक के दौरान BSNL के चेयरमैन अनुपम श्रीवास्तव ने दूरसंचार सचिव के समक्ष एक प्रजेंटेशन दिया, जिसमें कंपनी की वित्तीय हालत, उसका कुल घाटा, रिलायंस जियो के आने के बाद उसके कारोबार पर असर, संभावित तौर पर कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (वीआरएस) और समय से पहले सेवानिवृत्ति की योजना का विस्तृत विवरण पेश किया गया जिससे यह धारणा बलवती हुई हैं.

बीएसएनल पिछले तीन साल से लगातार नुकसान में है. यह नुकसान बढ़ता जा रहा है.

दरअसल 2018 तक बीएसएनएल के कुल कर्मचारियों की संख्या 1,74,000 थी. वही प्राइवेट कंपनियों में औसतन 25000 से 30000 कर्मचारी काम करते हैं. इस प्रकार बीएसएनएल के पास प्राइवेट कंपनी से पांच गुना ज्यादा कर्मचारी हैं. आईआईएम अहमदाबाद को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह पता लगाए कि बीएसएनएल इस दौर में किस तरह मजबूत बनी रह सकती है. उसकी रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी को अपने 35 ,000 कर्मचारियों को हटाना पड़ेगा.

हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का दावा करने वाली मोदी सरकार हजारों कर्मचारियों को घर बिठाने जा रहीं हैं, लेकिन कोई न्यूज़ चैनल या प्रिंट मीडिया यह बात खुलकर नही उठा रहा.