हमारे यहां शादी ब्याह को बहुत पवित्र रिश्ता माना जाता है। लेकिन एक गांव है जहां यह रिश्ता मजाक बन कर रह गया है। दरअसल, दोष गांव वालों का नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम का है। जी हाँ, आपने सही पढ़ा, सिस्टम का ही दोष है। पूरा राजस्थान के जैसलमेर से जुड़ा हुआ है, यहां यह  रिश्ता सरकारी कामो में फर्जीवाड़े का जरिया बना हुआ है।

खबर है कि यहाँ के सरपंच और VDO यानी विलेज डेवलपमेंट ऑफिसर ने मिलकर लगभग 80 नकली मैरिज सर्टिफिकेट बनाकर सरकारी योजना का लाभ लेने की कोशिश की। गनीमत है कि योजना का लाभ मिलने से पहले ही मामले की भनक गांव वालों को लग गयी।

जैसेलमेर का है मामला

ये सारा मामला राजस्थान के जैसलमेर में एक पंचायत समिति है “सम।” जिसमें एक ग्राम पंचायत है “तुर्कों की बस्ती।” यह पूरा मामला यहीं का है। दरअसल, इस पंचायत के सरपंच शोभे खान और ग्राम विकास अधिकारी राजमल रैगर ने मिलकर पंचायत “तुर्कों की बस्ती” में रहने वाले लगभग 80 लोगो के नकली मैरिज सर्टिफिकेट बना दिये हैं। ये सारा काम दोनों ने सहयोग उपहार योजना का लाभ पाने के लिए किया था। ध्यान देने वाली बात ये है कि इन नकली मैरिज सर्टिफिकेट में ऐसी कई लोगों की सरकारी शादियां करवा दी गईं जो समाज और रिश्तों को अपने आप शर्मसार कर देती हैँ।  

ससुर-बहु और भाई-बहन की बनाई जोड़ी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरपंच और वीडीओ ने अजीबो गरीब जोड़ियों के मैरिज सर्टिफिकेट बनाए। किसी मे स्कूली बच्चे के साथ महिला की सरकारी शादी करा दी गई, तो दूसरे सर्टिफिकटों में सगे बाप-बेटे की जोड़ी एक ही परिवार की सगी बहनों से बना दी।

कागज़ों में भाई-बहन तक की शादी करवा दी गयी। इतना ही नहीं बहु और ससुर की भी जोड़ी कागज़ों में दिखने को मिली। इसके अलावा योजना के लाभ के लिए सरपंच और VDO ने एक ही आदमी के चार से पांच मैरिज सर्टिफिकेट भी बना डाले। बता दें कि पंचायतों में मैरिज सर्टिफिकेट बनाने का अधिकार ग्राम विकास अधिकारी के पास होता है।

ग्राम विकास अधिकारी को सर्टिफिकेट बनाने का अधिकार

दैनिक जागरण के हवाले से किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में जन्म, मृत्यु और मैरिज सर्टिफिकेट बनाने का अधिकार केवल वीडीओ अधिकारी के पास होता है। अधिकारी के पास पहचान लॉगिन होता है।  जिससे वो सभी सर्टिफिकेट जारी करता है। इस लॉगिंन आईडी का प्रयोग सिर्फ अधिकारी ही कर सकता है। हर प्रमाण पत्र को जारी करते समय अधिकारी के फ़ोन पर एक ओटीपी आता है जिसे लगने के बाद ही पत्र जारी हो सकता है।

फर्जीवाड़े की भनक लगते ही गांव वालों ने इसकी शिकायत ग्राम विकास अधिकारी से की थी। मामले में अधिकारी ने कहा कि सरपंच ने ये आईडी उसके परिवार वालो को देने के लिए कही थी। ये सारा फर्जीवाड़ा सरपंच और उसके परिवार वालो का है। हालांकि, ओटीपी वाली बात पर वीडीओ ने कुछ नहीं कहा।

गांव वालों को यूं पता चला फर्जीवाड़े का

मीडिया के मुताबिक गांव में रहने वाला खुदाबक्श बताता है कि गांव में उसका भांजा ई-मित्र संचालन का काम करता है। उसने ही एक दिन अचानक विवाह पंजीयन की साइट पर अपने नाना आदू खान (82) का मैरिज सर्टिफिकेट देखा जो 1 जून 2021 को जारी किया गया था।

जबकि आदू खान की बीवी की 12 साल पहले मौत हो चुकी थी। मामले की खोजबीन की गई तो पाया गया कि मामा की शादी का भी पंजीकरण किया गया है। वहीं नाना और मामा दोनों की शादी का पंजीकरण एक ही घर की दो बहनों के साथ किया गया है। इसके बाद इस फर्जीवाड़े का पता पूरे गांव को चला।

क्या होती है सहयोग उपहार योजना

सहयोग उपहार योजना राजस्थान सरकार ने गरीब परिवार की लड़कियों की शादी के लिए शुरू की थी। जिसमें केवल बीपीएल यानी उन घरों की लड़कियों को आर्थिक सहायता दी जाती है जो गरीबी रेखा से नीचे हों।

इसके तहत 18 वर्ष की आयु में शादी के दौरन सरकार 31 हज़ार की राशि देती है वहीं अगर लड़की ने 10वीं पास की है तो उसे 41 हज़ार की राशि दी जाती है। इस योजना को आधार बनाकर ग्राम पंचायत” तुर्कों की बस्ती” में मैरिज सर्टिफिकेट के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया था।

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Sushma Tomar