October 27, 2020

मुगलों के समय से चला आ रहा है अपनी ताक़त,शौर्य, वीरता को मूर्तियों के रूप में राज्य में स्थापित कर देना। अपने शासन की नीतियों, कार्यक्रमों, विचारों से जनता को अवगत कराने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है। अपनी विचारधारा के अनुरूप महापुरुषों, ईश्वर या संकेतो को राज्य में पत्थर की मूरत के रूप में स्थापित करने का कारण लोगो की सोच को अपनी सोच के अनुसार ढालना हो सकता है।
आज़ादी के बाद से भारत में स्वतंत्रता सेनानियों व अन्य महापुरुषों की मूर्तियाँ को स्थान – स्थान पर लगाया गया जिससे हर भारतवासी में स्वतंत्रता की प्राप्ति का संघर्ष ताज़ा रहे व इन स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रदान कर सके। 1990 के बाद से इन मूर्तियों में विभिन्न राजनीतिक दलों की राजनीतिक मंशा नज़र आने लगी अब इनमें स्वतंत्रता का संघर्ष नहीं बल्कि कोई विशेष राजनीतिक विचारधारा को ढूंढा जाने लगा और उन महापुरुषों की पहचान की संकीर्ण नज़रिए से देखा जाने लगा।
सिर्फ राजनीतिक नहीं धार्मिक मामले में भी इसी प्रकार अपना प्रभाव फेलाने के लिए मूर्तियों का सहारा लिया जाता रहा है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या में सरयू नदी के तट पर श्री राम की अब तक की सबसे विशाल मूर्ति बनवाने का निर्णय लिया है राज्य में राम के प्रति भावना, भक्ति, विश्वास को बनाए रखने का शायद यही एक उचित रास्ता सरकार को दिखाई पड़ा। मरते बच्चे, महिलाओं को सुरक्षा, भगवाधारीयो का आतंक, शिक्षा व स्वास्थ्य की व्यवस्था को सिर्फ़ श्री राम ही संभाल सकते हैं इसलिए उनपर हज़ारों करोड़ लगाने की तैयारी की जा रही है। राज्य में अत्यंत खस्ता हाल होने के बावजूद योगी सरकार निहायती निचले स्तर की राजनीतिक सोच को आगे बढ़ाने पर तुली हुई है।
मूर्ति के स्थान पर वह पैसा अस्पतालों में सुविधाओं को बढ़ाने में, राज्य में सुरक्षा मज़बूत करने में व विकास के अन्य कार्यो में लगाया जा सकता है परंतु योगी सरकार 5 साल बाद की तैयारी में अभी से लगी हुई है। उत्तर प्रदेश पिछ्ले कुछ दशको से मूर्तियो की राजनीति में फसा हुआ है कभी हाथी द्वारा राजनीतिक प्रभाव जमाने की कभी राम द्वारा धार्मिक संघर्ष बढ़ाने की, इस बात को वहा कि सरकार को समझना होगा कि विकास का अर्थ मूर्तियो में नहीं है। हमारे राजनेतिक दल विकास विकास करते हुए सत्ता तक तो पहुँच जाते है परंतु विकास के सही अर्थ तक पहुंचने में अभी अक्षम है यहां विरोध राम का नहीं है न ही धर्म का है विरोध सरकार की अपरिपक्व सोच का है।
राम की नगरी में राम को मूर्ति के रूप मूर्ति के रूप में स्थापित कर दिया परंतु राम की नगरी में राम के मूल्यों को निकाल बाहर किया जहा तीन दिन में 70 से ज़्यादा नवजात शिशु दम तोड़ते हो, जहां हर महिला दर के साये में हो, जहां आम जन भय में जी रहा हो वहां राम कैसे प्रसन्न हो सकते हैं। महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने का एकमात्र साधन राम है जब जब लोगो ने योगी या भगवा सरकार से विकास पर जवाब मांगा है तब तब राम प्रकट हुए है आज भी उत्तर प्रदेश की खस्ता हालत से ध्यान बांटने हेतु राम मूर्ति के रूप में आए है।
धार्मिक विषय को लेकर भी योगी सरकार ने जनता की आकांक्षाओ को बढ़ाया है अयोध्या में राम मंदिर बनने के अभी कोई आसार नहीं है इसलिए तब तक के लिए राम की मूर्ति से काम चलाया जाए।

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Ankita Chauhan

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