भूख से मौत की खबरे आम सी हो गई है. अभी पिछले ही साल अक्टूबर में झारखंड के सिमडेगा में 11 साल की बच्ची संतोषी की भात-भात कहते हुए भूख की वजह से मौत हो गई थी. पत्रिका की खबर के अनुसार अब मामला झारखण्ड से दिल दहलाने वाली घटना सामने आ रही है. अब तीन महीने बाद एकबार झारखंड में एक और मौत हुई है. इस बार मौत की वजह भूख ही है.
क्या है पूरा मामला
लेकिन मरने वाली एक मां है. आधार कार्ड नहीं था, तो राशन नहीं मिलता था. गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली 40 वर्षीय बुधनी देवी की रविवार की सुबह मौत हो गई. मृतका की पुत्री सुनीता ने बताया कि घर में तीन-चार दिन से खाना नहीं बना था. आधार कार्ड नहीं होने की वजह से राशन कार्ड नहीं बना था और सरकार की ओर से सामाजिक कल्याण की किसी योजना का लाभ परिवार को नहीं मिल रहा था।
राशन कार्ड के लिए मांग रहे थे पैसे
मृतका की एक अन्य परिजन ने पत्रकारों को बताया कि राशन कार्ड बनवाने को लेकर मुखिया की ओर से भी पैसे की मांग की गई थी.

बेटी के मिड-डे मील पर चल रही थी मां की ज़िंदगी, छुट्टी के दिन भूख से तड़पते हुए तोड़ दिया दम
साभार:पत्रिका

स्कूल के भरोसे चल रही थी जिंदगी 
मृतका के आस-पड़ोस रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि वह सखुआ पेड़ के पत्तों से पत्तल व दोना बनाने का काम करती थी. वहीं स्कूल में पढ़ने वाले उसके बच्चे कभी-कभी मिड डे मील में मिलने वाले भोजन अपनी मां को लाकर खिलाते थे, लेकिन स्कूल बंद रहने की वजह से मध्याह्न भोजन भी बच्चे अपनी मां को लाकर नहीं दे सके और रविवार को इसी के चलते उसकी मौत हो गई. शुरु हुई दिखावे की छानबीन घटना की सूचना मिलने पर प्रशासन की ओर से स्थानीय लोगों के सहयोग से मृतका के घर अनाज उपलब्ध करा दिया गया है. हालांकि प्रशासनिक अधिकारी अपनी परंपरा के मुताबिक मामले की छानबीन की बात कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि यह मौत को भूख से नहीं, बल्कि बीमारी की वजह से हुई है.

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सुभाष बगड़िया

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