पश्चिम पंगाल की राजनीति में उस वक़्त भूँचाल आ गया , जब इस बात का खुलासा हुआ की भारतीय जनता पार्टी ने बांग्लादेश की तस्वीरों को बंगाल का बताकर दुष्प्रचार शुरू किया है.
दरअसल बंगाल में पंचायत चुनाव होने हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी किसी भी तरह जीत हासिल करना चाहती है, इसीलिए वोह बंगाल में खुले तौर पर हिन्दू मुस्लिम वोट के बीच में ध्रुवीकरण की कोशिश में लगी है.
इसी कड़ी में उस वक़्त भाजपा की भारी फजीहत हुई जब बंगाल के पंचायत चुनाव में भाजपा का मेनीफेस्टो उपयोग में की गई तस्वीरों का सच सामने आया. दरअसल जिन तस्वीरों को बंगाल का बताकर लगाया गया था, वो तस्वीरें बांग्लादेश की हैं और काफ़ी पुरानी है.
ये तस्वीरें उस समय की हैं, जब बांग्लादेश के धार्मिक नेताओं को सज़ा का ऐलान हुआ था. जिसके बाद पूरे बांग्लादेश में विरोश प्रदर्शन हुए थे.

यह तस्वीर बांग्लादेश की है, जिसे बंगाल की बताकर पेश किया जा रहा है

भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में बंगाल की जिन हिंसात्मक तस्वीरों को दिखाकर बंगाल में हिंदू विरोधी प्रोपगेंडा की बात कही थी वो अब निराधार निकली है, क्योंकि असल में तस्वीर बांग्लादेश की है.
मंगलवार को बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं के साथ मिलकर बीजेपी का घोषणापत्र जारी किया था. बीजेपी द्वारा अपने घोषणापत्र में बांग्लादेश के दंगों की तस्वीरों का इस्तेमाल करने को लेकर पार्टी विपक्ष के निशाने पर आ गई है,इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए इस कार्य को गुमराह करने वाला बताया है.
आज तक के अनुसार – ये पहली बार नहीं है जब बीजेपी ने फर्जी या असंबंधित तस्वीरों को बंगाल का बताते हुए जारी किया. बीते साल बसीरहाट हिंसा के दौरान बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने एक ऐसी तस्वीर को बंगाल का बताते हुए ट्वीट पर अपलोड किया था जो दरअसल 2002 गुजरात हिंसा की थी. नूपुर शर्मा पर कोलकाता पुलिस ने फर्जी खबर फैलाने को लेकर केस भी दर्ज किया था.

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