नज़रिया – फ़र्ज़ी मुठभेड़ें सिर्फ और सिर्फ एक हत्या है

नज़रिया – फ़र्ज़ी मुठभेड़ें सिर्फ और सिर्फ एक हत्या है

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, यह शब्द किसने और कहां ईजाद किया है, यह मैं नहीं बता पाऊंगा। पर पुलिस के कुछ मुठभेड़ों की वास्तविकता जानने के बाद, यह शब्द हत्या का अपराध करने की मानसिकता का पर्याय बन गया है। अगर सभी मुठभेड़ों की जांच सीआईडी से हो जाय तो बहुत कम पुलिस मुठभेड़ें कानूनन और सत्य […]

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 ओलांद के खुलासे के बाद, क्या मोदी सरकार देगी इन सवालों के जवाब ?

ओलांद के खुलासे के बाद, क्या मोदी सरकार देगी इन सवालों के जवाब ?

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के बयान कि उनके पास विकल्प नहीं था, और भारत सरकार ने जिस ग्रुप का नाम सुझाया, दसाल्ट ने उसे मान लिया, के बाद जो महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं, वे इस प्रकार हैं- जब पहले होने वाले सौदे जो यूपीए के समय मे हो रहा था, तब एचएएल का नाम […]

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 विशेष – सीबीआई, विजय माल्या का प्रकरण और लुक आउट नोटिस

विशेष – सीबीआई, विजय माल्या का प्रकरण और लुक आउट नोटिस

लुकआउट नोटिस और विजय माल्या, ये दो नाम, आजकल यह नाम काफी चर्चा में है। यह भी अपराध के वैश्वीकरण के एक कारण है। अब दुनिया वैसी दुर्लंघ्य नहीं रह गयी है जैसी कभी पहले थी। अब ह्वेनसांग से लेकर इब्नबतूता से होते हुए राहुल सांकृत्यायन तक तक दुनिया की सरहदें नाप लेने वाले, अपने […]

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 शादमान चौक पर लाहौर हाईकोर्ट का फैसला और भगत सिंह

शादमान चौक पर लाहौर हाईकोर्ट का फैसला और भगत सिंह

यह एक ऐसी खबर है जो तमाम जद्दोजहद और स्वार्थांधता  से भरी खबरों के माहौल में एक सुखद हवा के झोंके से समान आयी है। पछुआ हवा की तरह यह खबर सरहद पार से आयी है। यह न तो वहां के हुक़ूमत की खबर है और न ही उनके फौजी महकमे की और न ही […]

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 नोटबंदी, और आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुरामराजन की किताब आई डू, व्हाट आई डू

नोटबंदी, और आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुरामराजन की किताब आई डू, व्हाट आई डू

8 नवम्बर 2016 को रात्रि 8 बजे जब प्रधानमंत्री जी ने खुद ही टीवी पर आकर 1000 और 500 रुपये के नोटों को लीगल टेंडर या अमान्य कर देने की घोषणा की तो देश की कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया तब नहीं हुई। लोग अचानक हुयी इस घोषणा से अवाक थे। पर दूसरे दिन, लोगों ने चर्चा […]

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 खुद पर लगे आरोपों पर क्या कहती हैं "सुधा भारद्वाज" ?

खुद पर लगे आरोपों पर क्या कहती हैं "सुधा भारद्वाज" ?

सुधा भारद्वाज का यह बयान उनकी वकील वृंदा ग्रोवर के माध्यम से जारी हुआ है और अंग्रेज़ी दैनिक TheHindu में प्रकाशित हुआ है। यह बयान, मुंबई पुलिस द्वारा की गयी प्रेस कांफ्रेंस के बाद जारी किया गया है। सुधा भारद्वाज ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद और मिथ्या बताया है। हिंदी अनुवाद […]

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 "फ़िराक गोरखपुरी" के बारे में क्या ये जानते हैं आप ?

"फ़िराक गोरखपुरी" के बारे में क्या ये जानते हैं आप ?

फ़िराक़ साहब ( 28 अगस्त 1896 से 3 मार्च 1982 ) एक जीनियस थे। रहने वाले गोरखपुर के, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेज़ी के टॉपर, और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ही अंग्रेज़ी के अध्यापक, और उर्दू के एक अज़ीम शायर। ज़िंदगी का सफर भी उनका, कुछ गमें जानां तो कुछ दौरां। कभी प्रेयसी का गम, तो कभी […]

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 NRC, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स, एनआरसी ड्राफ्ट और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

NRC, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स, एनआरसी ड्राफ्ट और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

31 जुलाई 2018 को एनआरसी, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स की ड्राफ्ट रिपोर्ट प्रस्तुत हो गयी है। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 लाख लोगों की नागरिकता संदिग्ध है। ये वे लोग हैं जिनके नागरिकता के बारे में कोई सुबूत सरकार को नहीं मिले हैं। लेकिन यह एक ड्राफ्ट रिपोर्ट है, यह किसी की नागरिकता […]

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 कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

गांधी भी अजीब हैं। जो उनसे नफरत करते हैं वे भी उन जैसा बनना चाहते हैं। वे न उगलते बनते हैं न निगलते। न उन्हें खारिज किये बनता है, न उन्हें अपनाए। खारिज़ करें तो दुनिया सवाल करने लगती है, अपनाएं तो आत्मा की शुचिता और दौर्बल्य आड़े आता है। दुनिया के इतिहास में किसी […]

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 चुनाव और निर्वाचन आयोग की साख – एक प्रतिक्रिया

चुनाव और निर्वाचन आयोग की साख – एक प्रतिक्रिया

राजनीति में उखाड़ पछाड़ चलता रहता है। यह सनातन है। उसी तरह से संसदीय लोकतंत्र में हार जीत होती रहती है। बिल्कुल एक बनारसी कहावत की तरह, कभी घनीघना, कभी मुट्ठी भर चना कभी वह भी मना। लेकिन संसदीय लोकतंत्र को पटरी पर बनाये रखने के लिये जिन संस्थाओं का गठन संविधान में किया गया […]

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