खुद पर लगे आरोपों पर क्या कहती हैं "सुधा भारद्वाज" ?

खुद पर लगे आरोपों पर क्या कहती हैं "सुधा भारद्वाज" ?

सुधा भारद्वाज का यह बयान उनकी वकील वृंदा ग्रोवर के माध्यम से जारी हुआ है और अंग्रेज़ी दैनिक TheHindu में प्रकाशित हुआ है। यह बयान, मुंबई पुलिस द्वारा की गयी प्रेस कांफ्रेंस के बाद जारी किया गया है। सुधा भारद्वाज ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद और मिथ्या बताया है। हिंदी अनुवाद […]

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 "फ़िराक गोरखपुरी" के बारे में क्या ये जानते हैं आप ?

"फ़िराक गोरखपुरी" के बारे में क्या ये जानते हैं आप ?

फ़िराक़ साहब ( 28 अगस्त 1896 से 3 मार्च 1982 ) एक जीनियस थे। रहने वाले गोरखपुर के, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेज़ी के टॉपर, और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ही अंग्रेज़ी के अध्यापक, और उर्दू के एक अज़ीम शायर। ज़िंदगी का सफर भी उनका, कुछ गमें जानां तो कुछ दौरां। कभी प्रेयसी का गम, तो कभी […]

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 NRC, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स, एनआरसी ड्राफ्ट और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

NRC, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स, एनआरसी ड्राफ्ट और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

31 जुलाई 2018 को एनआरसी, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स की ड्राफ्ट रिपोर्ट प्रस्तुत हो गयी है। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 लाख लोगों की नागरिकता संदिग्ध है। ये वे लोग हैं जिनके नागरिकता के बारे में कोई सुबूत सरकार को नहीं मिले हैं। लेकिन यह एक ड्राफ्ट रिपोर्ट है, यह किसी की नागरिकता […]

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 कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

गांधी भी अजीब हैं। जो उनसे नफरत करते हैं वे भी उन जैसा बनना चाहते हैं। वे न उगलते बनते हैं न निगलते। न उन्हें खारिज किये बनता है, न उन्हें अपनाए। खारिज़ करें तो दुनिया सवाल करने लगती है, अपनाएं तो आत्मा की शुचिता और दौर्बल्य आड़े आता है। दुनिया के इतिहास में किसी […]

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 चुनाव और निर्वाचन आयोग की साख – एक प्रतिक्रिया

चुनाव और निर्वाचन आयोग की साख – एक प्रतिक्रिया

राजनीति में उखाड़ पछाड़ चलता रहता है। यह सनातन है। उसी तरह से संसदीय लोकतंत्र में हार जीत होती रहती है। बिल्कुल एक बनारसी कहावत की तरह, कभी घनीघना, कभी मुट्ठी भर चना कभी वह भी मना। लेकिन संसदीय लोकतंत्र को पटरी पर बनाये रखने के लिये जिन संस्थाओं का गठन संविधान में किया गया […]

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 सावरकर – अंग्रेजों को लिखे माफ़ीनामे से भारत विभाजन और गांधी जी की हत्या तक

सावरकर – अंग्रेजों को लिखे माफ़ीनामे से भारत विभाजन और गांधी जी की हत्या तक

वीडी सावरकर का 28 मई 1883 को भागुर, नासिक में जन्म हुआ था। उन्हें वीर सावरकर के नाम से पुकारा जाता है। भारतीय स्वाधीनता संग्राम जिसका प्रारम्भ 1857 से माना जाय तो, 1947 तक, इसके नब्बे साल के इतिहास में भारत के किसी भी स्वाधीनता संग्राम के सेनानी जो वीर नहीं कहा गया, यह विशेषण […]

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