नये कृषि कानून में जमाखोरी को क्यों वैध बनाया गया है ?

नये कृषि कानून में जमाखोरी को क्यों वैध बनाया गया है ?

8 दिसंबर, को किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में भारत बंद का आह्वान किया था। बंद सफल रहा । सबसे उल्लेखनीय बात थी कि, इस बंद में देश मे कहीं से भी हिंसा के समाचार नहीं मिले। लंबे समय के बाद, देश मे जनहित के मुद्दे पर जनता जागरूक दिखी और उसने अपने हक़ […]

Read More
 8 दिसंबर के भारत बंद के बाद किसान आंदोलन में क्या क्या हुआ ?

8 दिसंबर के भारत बंद के बाद किसान आंदोलन में क्या क्या हुआ ?

8 दिसंबर, को किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में भारत बंद का आह्वान किया था। बंद सफल रहा । सबसे उल्लेखनीय यह बात थी कि, इस बंद में देश मे कहीं से भी हिंसा के समाचार नहीं मिले। लंबे समय के बाद, देश मे जनहित के मुद्दे पर जनता जागरूक दिखी और उसने अपने […]

Read More
 सन 1907 का किसान आंदोलन, ” पगड़ी संभाल जट्टा “

सन 1907 का किसान आंदोलन, ” पगड़ी संभाल जट्टा “

सरदार अजीत सिंह, अमर शहीद भगत सिंह के चाचा थे। उन्होंने एक किताब लिखी है, बरीड अलाइव। आज जब देश भर के किसान, दिसंबर की इस ठंड में अपने परिवार के साथ, दिल्ली सीमा स्थित, सिंघु नामक स्थान पर, एक लाख ट्रैक्टरों और अन्य लवाजमे के साथ सरकार द्वारा पारित तीन किसान विरोधी, कृषि कानूनो  […]

Read More
 किसानों के मन की बात भी तो सुनिये, सरकार ?

किसानों के मन की बात भी तो सुनिये, सरकार ?

यूं ही हमेशा उलझती रही है, ज़ुल्म से खल्क, न उनकी रस्म नयी है, न अपनी रीत नयी, यू ही हमेशा, खिलाये हैं हमने आग में फूल, न उनकी हार नयी है, न अपनी जीत नयी ! मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की यह कालजयी पंक्तियां, आज भी प्रासंगिक हैं और कभी भी कालबाधित […]

Read More
 किसानों का यह आंदोलन क्या बदलाव की एक नयी इबारत लिख पायेगा ?

किसानों का यह आंदोलन क्या बदलाव की एक नयी इबारत लिख पायेगा ?

2014 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रबल झंझावात के बल पर भाजपा/ एनडीए की सरकार बनी थी। उम्मीदे भी थी, और गुजरात मॉडल का मायाजाल भी। नरेंद्र मोदी की क्षमता पर ज़रूरत से ज्यादा लोगों को भरोसा भी था। कांग्रेस का दस वर्षीय कार्यकाल खत्म हो रहा था। सबसे अधिक उम्मीद थी कि 2014 में […]

Read More
 क्या अब जनहित याचिकाओं को कमज़ोर किया जायेगा ?

क्या अब जनहित याचिकाओं को कमज़ोर किया जायेगा ?

अर्णब गोस्वामी के केस के माध्यम से निजी आज़ादी की मुखरता से बात करने वाली सुप्रीम कोर्ट अब संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दायर होने वाली याचिकाओं से लगता है असहज महसूस होने लगी है। सीजेआई एसए बोबडे ने कहा है कि वे अब अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दायर याचिकाओं को हतोत्साहित करने की […]

Read More
 ‘ जब तोप मुकाबिल हो, अखबार निकालो ! ‘ – अकबर इलाहाबादी

‘ जब तोप मुकाबिल हो, अखबार निकालो ! ‘ – अकबर इलाहाबादी

अकबर इलाहाबादी का यह बहुत प्रसिद्ध कलाम है । अकबर इलाहाबादी का पूरा नाम सैयद अकबर हुसैन था और वे इलाहाबाद के पास बारा के रहने वाले थे । उनका जन्म 16 नवम्बर 1846 को एक प्रतिष्ठित परिवार में और देहांत 9 सितम्बर 1921 को इलाहाबाद में हुआ था । अकबर ने अपनी प्राथमिक शिक्षा […]

Read More
 अर्णब प्रकरण, कुणाल कामरा के ट्वीट और सुप्रीम कोर्ट की साख

अर्णब प्रकरण, कुणाल कामरा के ट्वीट और सुप्रीम कोर्ट की साख

अटॉर्नी जनरल की संस्तुति के बाद अगर सुप्रीम कोर्ट में, कुणाल कामरा पर मानहानि का मुकदमा चलता है तो, यह इस साल की दूसरी बड़ी मानहानि की कार्यवाही होगी जो देश की लीगल हिस्ट्री में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखेगी। पहली प्रशांत भूषण का मुकदमा था और दूसरा कुणाल का होगा। कुणाल न तो कोई एडवोकेट […]

Read More
 “हम सब अपने अपने परसेप्शन खुद ही गढ़ते हैं”, राहुल पर ओबामा की टिप्पणी पर एक प्रतिक्रिया

“हम सब अपने अपने परसेप्शन खुद ही गढ़ते हैं”, राहुल पर ओबामा की टिप्पणी पर एक प्रतिक्रिया

हमारी समस्या एक यह भी है कि, हम यह चाहते है कि किसी व्यक्ति, विचार या घटना के बारे में जो मेरा परसेप्शन हो, वही हर व्यक्ति का भी हो। हम यह भूल जाते हैं कि, हर व्यक्ति किसी भी घटना, व्यक्ति और विचार के बारे मे अलग अलग तरह से सोचता है और उन […]

Read More
 व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वरवर राव का मुकदमा

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वरवर राव का मुकदमा

आज जब अर्णब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत प्राप्त अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए, जमानत दी तो एक पुराना मामला याद आया। यह मामला है तेलुगू के कवि और मानवाधिकार कार्यकर्ता वरवर राव का। वरवर राव भी अपने मुक़दमे में जमानत के लिये सुप्रीम कोर्ट गए थे, और […]

Read More