कल यानि गुरुवार को दिल्ली से यूनाइटेड अगेन्स्ट हेट का एक जांच दल अलीगढ़ में हुए लाईव एंकाउंटर की तफ़शीश करने अलीगढ़ गया था और दल के सदस्य में मारे गए नौशाद और मुस्ताकिम के घर भी गए और उनके परिवार के लोगो से मिल कर उनका पक्ष जाना.

इस टीम में कुछ में सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ वकील और पत्रकार भी थे। जांच दल ने जब उनके घर वालों और पड़ोसियों से बात की तो पता चला के पुलिस की बताई गयी और मीडिया में चल रही बातों में और गाँव वालों की बातों में बहुत फ़र्क़ है। लोगों ने यह भी बताया किस तरह एंकाउंटर के बाद परिवार वालों को और गाँव वालों को पुलिस परेशान कर रही है।

इसके बाद जांच दल के लोग उनके घर से अतरौली थाने गए वहाँ के इंचार्ज प्रवेश राणा से बात करने लगे तो वो बहुत ग़ुस्से में था और हर सवाल का जवाब उलटे ढंग से दे रहा थे। इसी दौरान उसके पास किसी का फ़ोन आया और उसने कहा “हाँ वो लोग मेरे सामने ही बैठे हैं” इतना कह कर फ़ोन रख दिया।जांच दल के किसी भी सवाल का ठीक से जवाब नहीं दिया जब हम चलने के लिए तैयार हुए तो अचानक थाने में 20-25लोग भगवा गमछे डाले हुए आए और हम लोगों को घेर कर खड़े हो गए।

उनके लीडर ने कहा जो मारे गए हैं वो बदमाश थे और अच्छा हुआ के मारे गए आगे भी ऐसे ही मारे जाएँगे और जो भी आतंकवादियों का समर्थन करेगा वो भी मारा जाएगा।

मौक़े पर हालात को देख कर जांच दल के सदस्य वहाँ से फ़ौरन बाहर निकल गए जब गाड़ी में बैठ रहे थे तब देखा तो पीछे से ट्रैक्टर ट्राली और मोटरसाइकलों से आए और लोग वहाँ जमा हो गए और थाने में भगवा गमछा पहने लोगों की भीड़ बढ्ने लगी. दल के सदस्यों ने किसी तरह वहाँ से गाड़ी भगा कर अपनी जान बचाई।

जांच दल के सदस्य नदीम खान ने बताया कि वो लोग पुलिस के बुलाने पर ही आए थे और हमारी टीम की लिंचिंग करने की पूरी तैयारी थी. जांच दल के सदस्य और पत्रकार प्रशांत टंडन के अनुसार अलीगढ़ में ऐसा माहोल बनाया जा रहा है ताकि कोई भी बाहरी पत्रकार या समाजसेवी वहाँ आकर तफ़तीश ना कर सके।

अलीगढ़ गये यूनाटेड अगेन्स्ट हेट के जांच दल में सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खान, किरण शाहीन, जेएनयू के छात्र उमर खालिद, डा. अंबेडकर विश्वविद्यालय की बनोज्योत्सना लाहीड़ी, सीनियर जर्नलिस्ट अमित सेन गुप्ता और प्रशांत टंडन भी थे जो 20 सितंबर को हुये एंकाउंटर की जांच करने गए थे जिसमे मुस्तक़ीम और नौशाद नाम के दो युवक मारे गए थे.