1 मार्च 1896 को वैज्ञानिक ऑनरी बेकेरल के एक प्रयोग के कारण रेडियोधर्मिता के बारे में पता चला. यह खोज अचानक ही हुई थी. रेडियोधर्मिता के पितामाह हेनरी बेकरेल का जन्म 15 दिसंबर 1852 को फ्रांस में हुआ. उनके पिता और दादा की तरह उनहोंने भी भौतिकी विज्ञान की पढ़ाई की.एंटोनी हेनरी बेकरेल की फ्लुओरेसंस सत्व की पढ़ाई में रूचि थी. उनके पिता एवं दादा जहाँ नौकरी करते थे.उसी जगह पर काम करने जा सौभाग्य एंटोनी हेनरी को प्राप्त हुआ. उनकी पढ़ाई इंकोल पालीटेक्निक में होने के बाद उनकी सन 1895 में उसी कॉलेज में प्रोफेसर ऑफ़ फिजिक्स के पद पर नियुक्ति हुई.

कैसे हुई रेडियोधर्मिता की खोज

1 मार्च 1896 को बेकरेल एक प्रयोग के दौरान यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि क्या प्रतिदिप्ति और विल्हेम रोएंटगेन द्वारा खोजे गए विकिरण में कोई सम्बन्ध है?
उन्होंने फोटोग्राफिक प्लेट को काले कागज में लपेटा और फिर अंधेरे में चमकने वाले फॉस्फोरेसेंट सॉल्ट को उस पर डाला. फिर यूरेनियम सॉल्ट का इस्तेमाल करते ही प्लेट काली होने लगी. इन रेडिएशन को बेकेरल किरणें कहा गया.
जल्द ही साफ हो गया कि प्लेट का काला होना फॉस्फोरेसेंट से नहीं जुड़ा है क्योंकि प्लेट काली तब हुई जब वह अंधेरे में रखी गई थी. यह भी समझ में आ रहा था कि किसी तरह का रेडिएशन है जो कागज को पार कर सकता है और प्लेट को काला कर सकता है. 1895 में विल्हेम रोएंटगेन ने एक्सरे का शोध कर लिया था. लेकिन फिर भी बेकेरल ने सोचा कि वह इन फोटोग्राफिक प्लेटों को डेवलप करेंगे.और उन्होंने पाया कि तस्वीरें फिर भी एकदम साफ हैं.इससे ये पता चला कि बिना किसी बाहरी ऊर्जा के यूरेनियम ने रेडिएशन छोड़ा. यही थी, रेडियोधर्मिता की पहली जानकारी.
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शुरू में वैज्ञानिक समुदाय ने बेकरेल की इस खोज की उपेक्षा की लेकिन जब मैडम मेरी क्यूरी ने यह दर्शाया कि यूरेनियम अकेला रेडियोधर्मी तत्व नहीं है, तब बेकरेल की खोज को मान्यता मिलने लगीं.

मेरी क्यूरी ने दर्शाया कि –

  • विकिरण की शक्ति उस यौगिक से निर्धारित नहीं होती, जिसका अध्ययन किया जाता है.
  • बल्कि यह नमूने में उपस्थित यूरेनियम या बोरियम की मात्रा से निर्धारित होती है.
  • विकिरण क्षमता अणुओं के विन्यास और यूरेनियम की पारंपरिक क्रिया में नहीं बल्कि स्वयं यूरेनियम की  आतंरिक संरचना में निहित होती है.
  • रेडियो धर्मिता एक परमाण्विक परिघटना है, इस तथ्य को रदरफोर्ड ने भी दर्शाया.
  • उसके बाद एंटोनी हेनरी बेकरेल की रेडियोधर्मिता की खोज को पूरी दुनिया में ख्याति मिलने लगी.

फिर उन्होंने एक और प्रयोग के जरिए बताया कि जो रेडिएशन उन्होंने ढूंढा वह एक्सरे नहीं है. एक्सरे न्यूट्रल होती हैं और चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर वो मुड़ती नहीं. लेकिन ये किरणें मुड़ गईं.
बेकरेल ने बताया कि यूरेनियम से निकलने वाली रेडियो किरणें सूर्यप्रकाश किरणों की तरह परावर्तित नहीं होंती और अगर वह किरणें हवा में छोड़ी जाएं तो हवा भी आयोनाइड होती है. बेकरेल के अनुसार रेडियोधर्मिता किरणें तीन प्रकार की होती हैं.अल्फ़ा, बीटा एवं गामा.
बेकरेल को उनकी रेडियोधर्मिता की खोज के लिए भौतिक विज्ञान का वर्ष 1903 को नोबेल पुरस्कार मैडम मेरी क्यूरी एवं प्रोफेसर पियरे क्यूरी के साथ प्रदान किया गया.बेकरेल ने चुम्बकीय पदार्थो के गुणधर्म एवं स्फटिक पदार्थ में सूर्यप्रकाश छोड़ने से उनके गुणधर्मो का भी अध्ययन किया.
बेकरेल की रेडियोधर्मिता की खोज से भौतिकी विज्ञान में क्रांति हुई.आज रेडियोधर्मिता तत्व का उपयोग कैंसर की बीमारी के इलाज के लिये किया जाता है. इस महान वैज्ञानिक का 25 अगस्त 1908 को निधन हो गया.
 

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Durgesh Dehriya

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