अडानी ने मुंबई एयरपोर्ट (Mumbai Airport) को हासिल करने के लिए मोदी सरकार की मदद से जो कमाल के कारनामे रचे हैं, वो भारतीय कारपोरेट के इतिहास में शायद एक दिन काला अध्याय साबित होंगे।

कल खबर आयी है कि अडानी समूह GVK ग्रुप के साथ विवाद के निपटारे के बाद मुंबई एयरपोर्ट में 74% हिस्सेदारी खरीदने जा रहा है । अब तक GVK ग्रुप बहुसंख्यक हिस्सेदारी के साथ मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन कर रहा था। मुबंई इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्त और लाभप्रद एयरपोर्टों में से एक है। मुंबई एयरपोर्ट में हिस्सेदारी के बाद 6 एयरपोर्ट अडानी ग्रुप के अधीन आ जाएंगे। इसके बाद अडानी ग्रुप देश का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर बन जाएगा।GVK यह एयरपोर्ट अडानी (Adani Group) को सौप दे इसके लिए मोदी सरकार में अपने रसूख का सहारा लेकर अडानी ने हर हथकण्डे अपनाए कुछ दिनों पहले खबर आयी थी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जीवीके समूह के प्रवर्तकों और मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (मायल) के अधिकारियों के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज करने जा रहा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की उस जांच के बाद उठाया जा रहा है, जिसमें हवाई अड्डा चलाने और संभालने में 705 करोड़ रुपये का कथित घोटाला उजागर हुआ है। ED ने जीवीके ग्रुप, उसके अध्यक्ष डॉ. जीवीके रेड्डी, उनके बेटे जीवी संजय रेड्डी और कई अन्य के खिलाफ खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। GVK समूह ने कई गड़बड़ियां की थी उसने एयरपोर्ट के जमीन पर कब्जा कर लिया लेकिन कोई डेवलपमेंट नही किया सारे ठेके अपनी कम्पनियों को दे दिए।

मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (Mumbai International Airport limited ) या मायल एक संयुक्त उद्यम कंपनी है, जिसका गठन जीवीके एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड, एयरपोर्ट अथॉरिटी इंडिया और कुछ अन्य विदेशी संस्थाओं द्वारा किया गया था। जीवीके जो आंध्रप्रदेश की जानीमानी कम्पनी है उसके पास 50.5 प्रतिशत शेयर हैं और 26 प्रतिशत एएआई के पास है। शेष हिस्सेदारी बिडवेस्ट और एयरपोर्ट्स कंपनी साउथ अफ्रीका (एसीएसए) के पास है।

काफी पहले से जीवीके ग्रुप ने बिडवेस्ट की हिस्सेदारी खरीदने की कोशिशों में लगा हुआ था, लेकिन इस बीच अडानी की नजरें मुंबई एयरपोर्ट पर टिक गई। हालांकि GVK को मौका दिया गया लेकिन वह बिडवेस्ट से उसकी हिस्सेदारी खरीदने में असफल रहा वह पहले से ही कर्ज में डूब रहा था।

अडानी ने बिडवेस्ट से उसकी हिस्सेदारी खरीदने का ऑफर दे दिया, बिडवेस्ट अपनी हिस्सेदारी उसे बेचने को तैयार था, अडानी देश भर के बंदरगाहों पर कब्जा करने के बाद अब देश के महत्वपूर्ण एयरपोर्ट पर नजरें जमाए बैठा था। GVK मुंबई एयरपोर्ट को अडानी के हाथों में जाने से हर हाल में बचाना चाहता था।

कर्ज घटाने और अदाणी समूह की तरफ से मुंबई एयरपोर्ट के प्रस्तावित अधिग्रहण को रोकने के लिए जीवीके समूह अपने एयरपोर्ट कारोबार का 79.1 फीसदी हिस्सा तीन निवेशकों को बेचकर 7,614 करोड़ रुपये निकालना चाहता था। लेकिन इस बीच सीबीआई ओर ED अपने काम पर लग गयी और तेजी से काम करते हुए उसने GVK समूह की कमर तोड़ दी।

अब GVK के पास मायल यानी मुंबई एयरपोर्ट अडानी को सौपने के अलावा कोई रास्ता नही बचा था, अब शायद सारे केस हल्के हो जाएंगे और GVK को निकलने के लिए सेफ पैसेज दे दिया जाएगा, क्रोनी केपटलिज़्म ऐसे ही काम करता है।